सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम (SIT) को राम मंदिर के दान की संभावित गबन पर एक हफ्ते में स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया। इस आदेश के बाद न्यायालय ने आगे की सुनवाई 20 जुलाई को निर्धारित की है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सुप्रीम कोर्ट ने SIT को एक हफ्ते में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया
  • अब तक आठ आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया है
  • जून 13 को गठित टीम ने 70 संदेहास्पद घटनाओं की पहचान की

नई दिल्ली – आयोध्या राम मंदिर के दान में गबन के संदेह पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने निगरानी को प्रभावी रूप से बढ़ा दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकान्त, जॉयमाल्या बघी और वी मोहन सहित तीन-न्यायाधीशों की बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम (SIT) को एक हफ़्ते के भीतर अपनी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया। यह आदेश चार सार्वजनिक हित याचिकाओं (PIL) के सुनवाई के बाद आया, जिनमें दान की स्वतंत्र, समयबद्ध जांच और सीएजी द्वारा लेखा‑जांच की मांग की गई थी।

पृष्ठभूमि और कानूनी परिप्रेक्ष्य

राम मंदिर के निर्माण के लिए 2020 में स्थापित राम जनमभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने लाखों भक्तों से विशाल राशि एकत्र की। इन दानों के प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी को लेकर कई शिकायतें उत्पन्न हुईं, जिससे 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने एक विशेष जांच टीम गठित की। इस टीम के सदस्य लखनऊ डिवीजन कमिश्नर विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन हैं। टीम ने अप्रैल‑जून 2026 के बीच लगभग 70 संदिग्ध घटनाओं को चिन्हित किया, जिसमें CCTV फुटेज में कर्मचारियों द्वारा नकद को व्यक्तिगत रूप से छुपाते हुए दिखाया गया।

वर्तमान प्रगति और गिरफ्तारी

अब तक टीम ने आठ व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, जो वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। गिरफ्तारियों में मंदिर के भीतर नकद प्रबंधन के जिम्मेदार लोग और बाहरी सहयोगी शामिल हैं। न्यायालय ने इन गिरफ्तारीयों को दंडात्मक उपाय के रूप में नहीं, बल्कि जांच की गंभीरता के संकेत के रूप में माना है।

राजनीतिक एवं सामाजिक प्रभाव

जांच के बाद ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने पदत्याग कर दिया, जिसे 6 जुलाई को स्वीकार किया गया। सामाजिक रूप से, इस मुद्दे ने लाखों भक्तों के धार्मिक भावना को आहत किया है, जबकि राजनीतिक दल – विशेषकर समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी – ने राज्य सरकार पर बड़े ‘मछली’ को बचाने का आरोप लगाया है। यह विवाद न्यायिक, प्रशासनिक और जनधारणा के कई स्तरों पर तनाव उत्पन्न कर रहा है।

आगे की राह

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, उत्तर प्रदेश सरकार और राम जनमभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भी जवाब देने का निर्देश दिया है। 20 जुलाई को निर्धारित अगली सुनवाई में यह देखा जाएगा कि क्या इस मामले में सीबीआई को शामिल किया जाएगा, या सीएजी द्वारा व्यापक लेखा‑जांच की जाएगी। यदि न्यायालय स्वतंत्र जांच को मान्यता देता है, तो यह भविष्य में धार्मिक दान के प्रबंधन में नई नियामक रूपरेखा स्थापित कर सकता है।