बुहाप में मॉडल‑अभिनेत्री Twisha Sharma की आत्महत्या के बाद CBI ने पति समरथ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को आवाज़ नमूना न देने का आरोप लगाया था, जिसे दोनों ने कड़ा इनकार किया। उनके वकीलों ने कहा कि केवल स्पष्टीकरण माँगे गए थे, न कि सहयोग से इनकार। यह मामला घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न के आरोपों के साथ जटिल हो रहा है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- समरथ और गिरिबाला ने आवाज़ नमूना न देने का कोई इरादा नहीं किया
- CBI ने उनके बयान को गलत समझा, अदालत में तथ्य स्पष्ट किए गए
- दूसरी पोस्ट‑मार्टेम जांच ने जिम्नास्टिक्स बेल को लिगेचर बताया
बुहाप में 12 मई को मॉडल‑अभिनेत्री Twisha Sharma के लटके हुए शरीर की खोज ने देश भर में धक्के का झटका दिया। 33 वर्ष की Twisha, पूर्व मिस पुणे, अपनी शादीशुदा घर में मृत पाई गईं, जिससे घरेलू दहेज, मानसिक उत्पीड़न और घरेलू हिंसा के आरोपों की लहर दौड़ गई। इस घटना के बाद केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) ने मामले को संभाला और पति समरथ सिंह तथा सास गिरिबाला सिंह को हिरासत में लिया।
विरोधी बयान और कानूनी विवाद
CBI ने अदालत को बताया कि समरथ ने आवाज़ नमूना देने से इनकार कर दिया, पर उनका वकील अजायब अहमद ने कहा कि यह पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा कि समरथ को केवल एक ट्रांसक्रिप्ट दिया गया था, जिस पर उन्होंने कुछ शंकाएँ उठाई थीं, और वे स्पष्टिकरण चाहते थे। इसी प्रकार, सास गिरिबाला की वकील, एनोश जॉर्ज ने कोर्ट में कहा कि गिरिबाला ने पहले ही तीन बार आवाज़ नमूना दिया है, इसलिए इनकार का कोई आधार नहीं है।
फॉरेंसिक रिपोर्ट और नई खुलासे
एक कोर्ट‑आदेशित दूसरी पोस्ट‑मार्टेम जांच और AIIMS दिल्ली की विस्तृत फॉरेंसिक रिपोर्ट ने पुष्टि की कि Twisha की लिगेचर एक जिम्नास्टिक्स बेल थी, जिसमें धातु की रिंग और उनकी त्वचा के टिशू के निशान मिले। AIIMS के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता ने कहा कि रिपोर्ट “वैज्ञानिक रूप से स्पष्ट” है और यह सत्य एवं न्याय के हित में CBI और न्यायपालिका दोनों के लिए मार्गदर्शक है।
परिवार के आरोप और सामाजिक पहलू
Twisha के परिवार ने कहा कि वह अपने पति और ससुराल वालों से दहेज‑संबंधी दबाव, मानसिक उत्पीड़न और घरेलू हिंसा का शिकार रही थी। उनकी माँ के साथ अंतिम कॉल में, समरथ के आवाज़ में चिल्लाहट सुनाई गई, जिसके बाद कॉल अचानक कट गया। आगे की जांच में पता चला कि गिरिबाला ने फोन पर परिवार के सदस्य को “वह अब नहीं रही” कहकर सूचना दी।
अब CBI AIIMS की रिपोर्ट की गहन जाँच कर रही है, ताकि यह तय किया जा सके कि आगे कौन से कानूनी कदम उठाए जाएँ। यह मामला न केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी को उजागर करता है, बल्कि भारतीय समाज में दहेज‑प्रथा, घरेलू हिंसा और न्यायिक प्रक्रियाओं की कमजोरियों पर भी सवाल उठाता है।