राजस्थान के कोटा में प्रसव के बाद किडनी फेल होने वाली पांच महिलाओं ने डायलिसिस करने से मना कर दिया है। किडनी ट्रांसप्लांट की मांग पूरी न होने पर उन्होंने इच्छामृत्यु (Euthanasia) की अनुमति देने की मांग की है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसव के बाद पांच महिलाओं की दोनों किडनियाँ फेल हो गईं।
  • महिलाओं का आरोप है कि चिकित्सा लापरवाही और नकली दवाओं के कारण यह स्थिति पैदा हुई।
  • किडनी ट्रांसप्लांट की मांग पूरी न होने पर महिलाओं ने डायलिसिस से इनकार कर दिया है।
  • पीड़ित परिवारों ने अब सरकार से इच्छामृत्यु (Euthanasia) की अनुमति मांगी है।

राजस्थान के कोटा से एक हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहाँ प्रसव के बाद गंभीर रूप से बीमार पांच महिलाओं ने जीवन के संघर्ष को त्यागने का निर्णय लिया है। कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती इन महिलाओं ने प्रशासन को दिया गया अपना 48 घंटे का अल्टीमेटम खत्म होने के बाद अब डायलिसिस कराने से साफ इनकार कर दिया है। इन महिलाओं का कहना है कि यदि सरकार उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा नहीं दे सकती, तो उन्हें सम्मानजनक मृत्यु यानी इच्छामृत्यु (Euthanasia) की अनुमति दी जाए।

चिकित्सा लापरवाही के गंभीर आरोप

पीड़ित महिलाओं—रागिनी मीणा, आरती चौबदार, पिंकी एयरवाल, सुशीला महावर और धन्नी सुमन—का आरोप है कि मई 2026 के शुरुआती दिनों में प्रसव के दौरान अस्पताल में हुई चिकित्सा लापरवाही और संदिग्ध रूप से नकली दवाओं के उपयोग के कारण उनकी दोनों किडनियाँ खराब हो गईं। पिछले 70 दिनों से ये महिलाएं जीवन और मृत्यु के बीच झूल रही हैं। उनके परिवारों का कहना है कि हर दो-तीन दिन में होने वाला डायलिसिस न केवल उन्हें शारीरिक रूप से तोड़ रहा है, बल्कि मानसिक रूप से भी उन्हें पूरी तरह से खत्म कर चुका है।

असहनीय पीड़ा और प्रशासन की चुप्पी

पीड़ितों में से एक, पिंकी एयरवाल, ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि डायलिसिस के बाद उन्हें तेज बुखार, उल्टी और अत्यधिक कमजोरी का सामना करना पड़ता है। वहीं, धन्नी सुमन ने स्पष्ट किया कि प्रशासन को बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। परिवारों का कहना है कि वे अपनी बेटियों और बहुओं को इस तरह तड़पते हुए नहीं देख सकते। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई, तो वे इस मामले को भारत के राष्ट्रपति तक ले जाएंगे।

अस्पताल का पक्ष और चिकित्सा प्रोटोकॉल

दूसरी ओर, न्यू मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. Nilesh Jain ने लापरवाही के आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि सभी पांच महिलाएं वर्तमान में स्थिर हैं और उन्हें मुख्यमंत्री आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज मिल रहा है। डॉक्टर का तर्क है कि चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुसार, यह तय करने के लिए कि किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता है या नहीं, कम से कम तीन से छह महीने का इंतजार करना आवश्यक है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि डायलिसिस जारी रखना जीवन बचाने के लिए अनिवार्य है, जबकि महिलाएं अब इसे और अधिक सहन करने में असमर्थ हैं।