कर्नूल जिले में पेयजल संकट को दूर करने के लिए तुंगभद्रा जलाशय से 1.5 TMCFT पानी छोड़ा जाएगा। जिला कलेक्टर ने सख्त निर्देश दिए हैं कि इस पानी का उपयोग केवल पीने के लिए किया जाए।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • तुंगभद्रा जलाशय से 1.5 TMCFT पेयजल छोड़ा जाएगा।
  • पानी की निकासी गुरुवार सुबह 9 बजे 900 क्यूसेक की दर से शुरू होगी।
  • प्रशासन ने सिंचाई के लिए पानी के उपयोग पर सख्त पाबंदी लगाई है।
  • नहर नेटवर्क के माध्यम से पानी को जिले तक पहुँचने में लगभग एक सप्ताह लगेगा।

आंध्र प्रदेश के कर्नूल जिले के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। जिले में बढ़ते पेयजल संकट को देखते हुए, तुंगभद्रा जलाशय से 1.5 TMCFT (Thousand Million Cubic Feet) पानी छोड़ने का निर्णय लिया गया है। यह कदम स्थानीय निवासियों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने और जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

प्रशासनिक तैयारी और समयसीमा

जिला कलेक्टर ए. सिरी के अनुसार, पानी की निकासी गुरुवार, 16 जुलाई को सुबह 9:00 बजे से शुरू की जाएगी। पानी को 900 क्यूसेक की नियंत्रित दर से छोड़ा जाएगा। नहर नेटवर्क की जटिलता और दूरी को देखते हुए, विशेषज्ञों और जिला प्रशासन का अनुमान है कि पानी को कर्नूल के लक्षित क्षेत्रों तक पहुँचने में लगभग एक सप्ताह का समय लग सकता है।

कड़े नियम और निगरानी

प्रशासन ने इस जल आपूर्ति को लेकर अत्यंत सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि यह पानी विशेष रूप से केवल पेयजल की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवंटित किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस पानी का उपयोग सिंचाई या किसी अन्य व्यावसायिक उद्देश्य के लिए करना पूरी तरह से वर्जित है।

किसी भी प्रकार के अनधिकृत डायवर्जन, अवैध निकासी या पानी के दुरुपयोग की स्थिति में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर ने जल संसाधन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे आपूर्ति चैनलों के साथ निरंतर निगरानी बनाए रखें ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पानी का हर बूंद केवल मानवीय उपभोग के लिए उपयोग हो।

क्षेत्रीय जल प्रबंधन का महत्व

तुंगभद्रा नदी क्षेत्र में जल प्रबंधन हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। कर्नूल जैसे क्षेत्रों में, जहाँ जनसंख्या का दबाव बढ़ रहा है, पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। इस ताजा कदम से न केवल प्यास बुझेगी, बल्कि आने वाले दिनों में संभावित जल संकट से भी राहत मिलेगी।