वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ध्रुव कांत ठाकुर ने चेतावनी दी है कि साइबर अपराध देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। उन्होंने डिजिटल अरेस्ट और एआई स्पूफिंग जैसे बढ़ते खतरों पर चिंता व्यक्त की है।

मुख्य बातें

  • साइबर अपराध पारंपरिक सुरक्षा मॉडलों को चुनौती दे रहा है।
  • डिजिटल अरेस्ट और एआई (AI) वॉइस स्पूफिंग जैसे नए खतरे बढ़ रहे हैं।
  • पुलिस को जनता के बीच विश्वास बहाली के लिए अधिक लोगों के अनुकूल दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
  • जागरूकता अभियान और स्थानीय भाषाओं का उपयोग करना अनिवार्य है।

उत्तर प्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ध्रुव कांत ठाकुर ने रविवार को कहा कि साइबर अपराध उभरती हुई चुनौतियों में सबसे प्रमुख है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह अपराध पारंपरिक सुरक्षा मॉडलों को दरकिनार कर देता है, जिससे निपटने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

हाल ही में राष्ट्रपति पदक (PSM) से सम्मानित होने वाले श्री ठाकुर ने बताया कि आगामी दशक में साइबर अपराध देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगा। उन्होंने विशेष रूप से 'डिजिटल अरेस्ट' और एआई-आधारित वॉयस और वीडियो स्पूफिंग के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ये घोटाले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित सिंडिकेट के माध्यम से संचालित हो रहे हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जैसे-जैसे तकनीक विकसित हो रही है, अपराधी भी अधिक परिष्कृत हो रहे हैं। केवल तकनीकी समाधान पर्याप्त नहीं हैं; नागरिकों को भी सतर्क रहना होगा। श्री ठाकुर के अनुसार, संदिग्ध नंबरों पर प्रतिक्रिया देने के बजाय सीधे पुलिस या बैंक हेल्पलाइन से संपर्क करना ही सुरक्षा की पहली कड़ी है।

साइबर अपराध एक व्यापक हाइब्रिड घोटाला नेटवर्क है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित सिंडिकेट के माध्यम से काम कर रहा है।

श्री ठाकुर, जो वर्तमान में उत्तर प्रदेश में महानिदेशक (होम गार्ड्स और नागरिक सुरक्षा) के रूप में कार्यरत हैं, ने सुझाव दिया कि पुलिस को वर्ष 2000 के बाद पैदा हुई पीढ़ी के साथ विश्वास कायम करना होगा। उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों और आवासीय कल्याण संघों (RWAs) में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

साइबर अपराध का स्वरूप पिछले एक दशक में पूरी तरह बदल गया है। जहाँ पहले यह केवल साधारण फिशिंग तक सीमित था, वहीं अब यह 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे मनोवैज्ञानिक युद्ध का रूप ले चुका है, जहाँ अपराधी खुद को कानून प्रवर्तन अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं।

क्या आप जानते हैं?: साइबर अपराधी अब 'डीपफेक' तकनीक का उपयोग करके आपके प्रियजनों की आवाज और चेहरा भी कॉपी कर सकते हैं ताकि आपको ठगा जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें?
कभी भी किसी अज्ञात कॉल पर डरें नहीं। यदि कोई खुद को पुलिस अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर डराता है, तो तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित करें।

2. साइबर अपराध की रिपोर्ट कहाँ करें?
आप भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।