कर्नाटक के सर्वेक्षण एवं सूचना रिपोर्ट (SIR) ने अब तक 82% वॉटररोल कवर किया है, पर बेंगलुरु के कुछ विधानसभा क्षेत्रों में वितरण बहुत धीमा है। बोम्मनाहली 35.01% पर सबसे कम, बेंगलुरु साउथ 39.95% और गोविंदराजनगर 40.25% पर रही।
कर्नाटक राज्य की निर्वाचन सूची (SIR) ने वर्तमान में 82% कवर कर लिया है, पर बेंगलुरु के कई विधानसभा क्षेत्रों में सूची वितरण की गति अपेक्षाकृत धीमी है। यह स्थिति चुनावी तैयारी में संभावित चुनौतियों को उजागर करती है, क्योंकि सटीक वॉटररोल ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया की नींव है।
वर्तमान वितरण आँकड़े
कुशलता से तैयार किए गए आंकड़ों के अनुसार, बेंगलुरु के बोम्मनाहली विधानसभा क्षेत्र ने केवल 35.01% सूची वितरण दर्ज किया है, जो सबसे कम प्रतिशत है। इसके बाद बेंगलुरु साउथ (39.95%) और गोविंदराजनगर (40.25%) क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। इन तीन क्षेत्रों में सूची वितरण की कमी का कारण प्रशासनिक अड़चनें, जनसंख्या की उच्च घनत्व, और डिजिटल साक्षरता की सीमितता माना जा रहा है।
इतिहास और पृष्ठभूमि
कर्नाटक ने पिछले दो राष्ट्रीय चुनावों में अपनी निर्वाचन सूची को समय पर अपडेट करने में काफी प्रगति की है। 2019 में SIR कवरेज 75% था, जबकि 2024 के चुनाव में इसे 82% तक पहुंचाया गया। यह सुधार मुख्यतः डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के विस्तार, मोबाइल एप्लिकेशन के उपयोग, और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से संभव हुआ। फिर भी शहरी क्षेत्रों में विशेष रूप से बेंगलुरु जैसे महानगरों में, अत्यधिक जनसंख्या प्रवाह और आवासीय परिवर्तन सूची अपडेट को जटिल बनाते हैं।
संभावित प्रभाव और चुनौतियाँ
कम वितरण वाले क्षेत्रों में मतदाता पहचान प्रक्रिया में देरी, वोटर एलीजिबिलिटी में गड़बड़ी और संभावित मतदान बोतलनेक की संभावना बढ़ सकती है। चुनाव आयोग ने पहले ही चेतावनी दी है कि यदि सूची अपडेट नहीं हुई तो चुनाव के दिन तकनीकी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जल्द से जल्द अतिरिक्त जनजागरूकता अभियानों और मोबाइल रजिस्ट्री ड्रॉप-इन सेंटर्स की स्थापना से इस अंतर को पाटना आवश्यक होगा।
आगे की राह
राज्य सरकार और चुनाव आयोग ने मिलकर 2024 के अंतिम चरण तक सभी शेष क्षेत्रों में सूची वितरण को 95% तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में, डिजिटल साक्षरता कार्यशालाओं, नयी डेटा एंट्री टीमों की नियुक्ति, और स्थानीय NGOs के सहयोग से अधिकतम प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। यदि इन उपायों को सही समय पर लागू किया गया तो बेंगलुरु के कमजोर क्षेत्रों में भी सूची कवरेज में उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है।