कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बेंगलुरु दक्षिण जिले को दूसरे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के संभावित स्थल के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि चयनित स्थान में न्यूनतम जनसंख्या विस्थापन और कम भूमि मूल्य होना चाहिए, ताकि वित्तीय बोझ कम रहे।

बेंगलुरु के प्रमुख राजनैतिक और आर्थिक केंद्र के रूप में विकास की गति तेज़ है, लेकिन मौजूदा कैम्पेगौड़ा हवाई अड्डे की क्षमता सीमित होने के कारण दोबारा विस्तार की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इस संदर्भ में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 9 जुलाई को बेंगलुरु दक्षिण जिले को संभावित स्थल के रूप में नामित किया, जिससे राज्य सरकार का यह संकेत मिलता है कि वह जनसंख्या विस्थापन को न्यूनतम रखने वाले विकल्प की ओर झुका है।

विस्थापन को कम करने की नीति

मुख्यमंत्री ने कहा, “हम चाहते हैं कि यह परियोजना बड़े पैमाने पर लोगों को विस्थापित न करे। यदि कुछ ही घरों का पुनर्वास करना पड़े तो वह स्वीकार्य है। इसलिए हमने अधिकारियों को ऐसे स्थान चुनने का निर्देश दिया है जहाँ मानव बस्ती, पहाड़ियाँ कम हों और तकनीकी रूप से संभव हो।” यह बयान सरकार की सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, विशेषकर जब बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में जनसंख्या विस्थापन अक्सर विवाद का कारण बनता है।

भौगोलिक और आर्थिक विचार

शिवकुमार ने यह भी जोड़ते हुए कहा कि चयनित क्षेत्र में भूमि की कीमतें अत्यधिक नहीं होनी चाहिए, ताकि मुआवजा देनदारी का बोझ सरकार पर न पड़े। बेंगलुरु दक्षिण, जो स्वयं मुख्यमंत्री का गृह जिला है, में तुलनात्मक रूप से कम आबादी और कम मूल्यांकन वाली भूमि उपलब्ध है, जिससे वित्तीय जोखिम कम रहेगा। इस दिशा में, भारत सरकार के एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) की उच्च स्तरीय टीम ने अप्रैल 2025 में तीन संभावित साइटों का सर्वेक्षण किया था: चूडहली और सोमनहली (कनकपुरा रोड) तथा नेलामंगल‑कुनीगल रोड पर एक स्थल।

विदेशी सलाहकारों की भूमिका

सरकार ने इन तीन विकल्पों की व्यवहार्यता का अध्ययन करने के लिए एक सिंगापूर की परामर्श फर्म को नियुक्त किया है। स्रोतों के अनुसार, कनकपुरा रोड के दो स्थल अब तक सबसे अधिक पसंद किए गए हैं, क्योंकि वे तकनीकी रूप से उपयुक्त और कम जनसंख्या घनत्व वाले हैं। यह चयन प्रक्रिया जलवायु, पर्यावरणीय प्रभाव और कनेक्टिविटी जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखेगी।

भविष्य की दिशा

यदि बेंगलुरु दक्षिण में नया हवाई अड्डा स्थापित हो जाता है, तो यह दक्षिणी भारत के हवाई यातायात को पुनः आकार देगा, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देगा और राष्ट्रीय हवाई नेटवर्क को सुदृढ़ करेगा। साथ ही, यह परियोजना कर्नाटक की आर्थिक वृद्धि को तेज़ करने के साथ-साथ स्थानीय रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी। आगे की कार्यवाही में भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी और वित्तीय मॉडल की अंतिम रूपरेखा तय होगी।