राजस्थान कांग्रेस ने भाजपा सरकार द्वारा यूनीफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर सार्वजनिक परामर्श शुरू करने पर तीखा विरोध किया, क्योंकि मसौदा बिल जनता के सामने नहीं रखा गया है। पार्टी ने पूर्ण ड्राफ्ट की माँग की और इस कदम को सामाजिक सामंजस्य पर प्रहार बताया।

राजस्थान में कांग्रेस ने बुधवार को भाजपा सरकार द्वारा यूनीफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर सार्वजनिक परामर्श शुरू करने पर कड़ा विरोध किया। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि मसौदा बिल को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध न कराए बिना ‘सुनवाई’ कराना जवाबदेही से बचने का प्रयास है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सामाजिक एकता को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से इस पहल को आगे बढ़ा रही है।

पृष्ठभूमि और प्रक्रिया

बीजेपी‑शासित राजस्थान ने 22 जून को उच्चस्तरीय समिति का गठन किया, जिसका नेतृत्व पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज रंजना प्रकाश देसाई कर रहे हैं। इस समिति को यूसीसी के लिए एक व्यापक विधायी ढाँचा तैयार करने का काम सौंपा गया है। इसके तहत विवाह, तलाक, बहुविवाह, लिव‑इन रिलेशनशिप और उत्तराधिकार जैसे मुद्दों को एक समान कानूनी व्यवस्था में लाने की योजना है। राज्य ने जयपुर में 10‑11 जुलाई को सार्वजनिक सुनवाई की घोषणा की, साथ ही एक विशेष वेब‑पोर्टल के माध्यम से नागरिकों से सुझाव मांगे।

कांग्रेस का मुख्य आरोप

डोटासरा ने कहा, “ड्राफ्ट के बिना जनता की कोई प्रतिक्रिया नहीं ली जा सकती। सरकार इस तरह जवाबदेही से बच रही है।” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब जल, बिजली, सड़कें, अपराध और किसानों की समस्याएँ गंभीर हैं, तो सरकार क्यों यूसीसी को प्राथमिकता दे रही है। कांग्रेस के अन्य नेताओं, जैसे टिकाराम जुली और एम.डी. चोपड़र, ने भी पूर्ण ड्राफ्ट को सार्वजनिक करने की मांग की, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

रिपोर्टेड बदलाव और संभावित प्रभाव

UCC के प्रमुख प्रस्तावों में विवाह और तलाक की अनिवार्य पंजीकरण, बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध, लिव‑इन रिलेशनशिप की पंजीकरण आवश्यकता, और उत्तराधिकार में बेटे‑बेटी दोनों को समान अधिकार शामिल हैं। यदि लागू किया गया, तो व्यक्तिगत कानून—जैसे हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई—का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। इससे सामाजिक विविधता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस बढ़ने की संभावना है, विशेषकर उन राज्यों में जहाँ tribal या धार्मिक समुदायों को विशेष संरक्षण मिलता है।

आगे का रास्ता

राज्य में पहले उत्तराखंड ने फरवरी 2024 में UCC लागू किया, उसके बाद गुजरात, असम और मध्य प्रदेश ने समान पहलें शुरू कीं। राजस्थान की इस पहल को लेकर विपक्षी दलों ने इसे विकास और कानून व्यवस्था से ध्यान हटाने का साधन बताया। यदि कांग्रेस की मांगें पूरी नहीं हुईं, तो संभावित विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है, जिससे आगामी विधानसभा चुनावों में भी असर पड़ सकता है।