राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने दान घोटाले के बाद अपनी बैंकिंग कार्यवाही को संभालने के लिए तीन वरिष्ठ विशेषज्ञों की अंतरिम टीम बनाई। यह टीम जुलाई 22 की बैठक तक ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों की देखरेख करेगी।
अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को संचालित करने वाली राम जनमभूमी तीर्थ क्षेत्र (Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra) ने दान घोटाले के बाद हुए बड़े पदत्यागों के बाद एक नई तीन-सदस्यीय अंतरिम टीम गठित की। इस टीम को ट्रस्ट के बैंकिंग‑संबंधी सभी कार्यों की देखरेख करने का काम सौंपा गया है, जिससे वित्तीय पारदर्शिता और सार्वजनिक भरोसा पुनः स्थापित किया जा सके।
पृष्ठभूमि और कारण
वर्ष 2025 में घोषित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) में बदलाव के बाद दान गिनती में संभावित लापरवाही के आरोप लगे। इससे ट्रस्ट के पूर्व जनरल सचिव चम्पत राय और सदस्य अनिल मिश्रा सहित कई अधिकारियों ने इस्तीफा दिया। इन घटनाओं ने ट्रस्ट को वित्तीय प्रबंधन में अस्थिरता की स्थिति में डाल दिया, जिससे तत्काल प्रतिस्थापन की आवश्यकता उत्पन्न हुई।
नयी टीम के सदस्य
त्रिपक्षीय टीम में शामिल हैं: कृष्ण मोहन, सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा (IFoS) अधिकारी, जिन्हें अंतरिम जनरल सचिव नियुक्त किया गया है; जगदीश अफ़ाले, आईआईटी बंबई के एलुमनी और सिविल इंजीनियर, जिन्होंने मंदिर निर्माण के दौरान प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में काम किया; तथा चार्टर्ड अकाउंटेंट चंदन राय, जो वित्तीय लेखा‑जांच में विशेषज्ञता रखते हैं। इन तीनों को ट्रस्ट के मौजूदा वित्तीय ढाँचे को स्थिर करने और आगामी जुलाई 22 की बैठक तक सभी बैंकिंग लेन‑देन को नियंत्रित करने का आदेश दिया गया है।
वित्तीय कार्यों की नई रूपरेखा
टीम को दान एकत्रीकरण, बैंक खातों की निगरानी, और SOP के पुनः मूल्यांकन की जिम्मेदारी दी गई है। चंदन राय ने कहा है कि वे “सभी लेन‑देन की पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करेंगे” और “सभी संबंधित प्रलेखों को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराएंगे”। इस पहल का उद्देश्य दान चोरी के आरोपों को खारिज करना और लोगों के मन में मौजूद शंकाओं को दूर करना है।
आगे की योजना और संभावित प्रभाव
जुलाई 22 की बैठक में ट्रस्ट नई स्थायी टीम का चयन करेगा और अंतरिम समिति को उसके कार्य समाप्ति का निर्देश देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई टीम समय पर स्थापित हो गई, तो ट्रस्ट के वित्तीय संचालन में स्थिरता आएगी और मंदिर के निर्माण कार्य को भी बिना किसी बाधा के आगे बढ़ाया जा सकेगा। साथ ही, इस कदम से सरकार और न्यायिक जांच एजेंसियों के साथ सहयोग में भी सुधार की संभावना है।
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने भी इस नई टीम के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई है, यह स्पष्ट करते हुए कि उनका मुख्य उद्देश्य “धार्मिक स्थल की सुगमता से संचालन” है।