झारखंड की राजधानी रांची में स्कॉर्पियो बाइक द्वारा महिलाओं की कार का कई किलोमीटर तक पीछा करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने सरकार को सुरक्षा‑व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए, जबकि रांची पुलिस ने घटना के बाद त्वरित कार्रवाई का दावा किया।

जुलाई 7, 2026 को झारखंड के रांची‑टाटा हाईवे पर एक काली स्कॉर्पियो बाइक ने तीन महिलाएं सवार एक डिज़ायर कार को कई किलोमीटर तक घातक रूप से पीछा किया, ऐसा वीडियो स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर तीव्र चर्चा का कारण बना। वीडियो में स्पष्ट रूप से दिखता है कि स्कॉर्पियो सवारों ने कार को बाधित करने की कोशिश की, शीशे तोड़ने और गेट को नुकसान पहुंचाने के बाद महिलाओं को डराने की कोशिश की। घटना के बाद सोशल मीडिया पर #RanchiWomenSafety ट्रेंड करने लगा।

घटना की पृष्ठभूमि और सामाजिक प्रतिक्रिया

रांची के दशम फॉल क्षेत्र से लेकर हाईवे तक इस घटना को कई नागरिकों ने देखे और तुरंत पुलिस को 112 पर सूचना दी। लेकिन वीडियो में दिखता है कि पुलिस की प्रतिक्रिया में देरी रही, जिससे महिलाओं को असुरक्षित महसूस हुआ। इस तथ्य ने झारखंड में महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे को फिर से उजागर कर दिया, जहाँ पहले भी कई समान घटनाओं की रिपोर्टें सामने आई थीं।

बाबूलाल मरांडी का तीखा बयान

पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने ट्विटर (अब X) पर इस घटना को "भयावह" कहा और राज्य सरकार पर "कानून‑व्यवस्था के अभाव" का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्यमंत्री हे​मंत सोरेन को टैग करते हुए कहा कि निवेशकों को सुरक्षित माहौल चाहिए, लेकिन सुरक्षा की गड़बड़ी के कारण कोई भी निवेशक भरोसा नहीं करेगा। मरांडी ने विशेष रूप से पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा उपायों की कमी की ओर इशारा किया, जहाँ मौसमी और पर्यटन सीजन में ऐसे हादसे आर्थिक नुकसान का कारण बन सकते हैं।

रांची पुलिस का उत्तर

रांची पुलिस ने 7 जुलाई को 12:39 बजे 112 पर प्राप्त सूचना के बाद छह मिनट में बाइक दस्ता और दस मिनट में गस्ती दल को मौके पर पहुँचाया, इसका दावा किया। पुलिस का कहना है कि उन्होंने तुरंत डिज़ायर कार को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर पीड़ितों को थाने में बिठाया। स्कॉर्पियो सवारों में राजकुमार महतो और जोएब रजा शामिल थे, जिन्हें थाने में पूछताछ के बाद समझौते के तहत मामला सुलझा लिया गया।

कानूनी और नीति‑स्तरीय प्रभाव

ऐसे मामलों में अक्सर पीड़ितों की शिकायत दर्ज नहीं करवाई जाती, जिससे न्यायिक प्रक्रिया बाधित होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड को महिला सुरक्षा के लिए विशेष हाईवे निगरानी कैमरों, तेज़ प्रतिक्रिया इकाइयों और सार्वजनिक जागरूकता अभियान शुरू करने चाहिए। इसके अलावा, राज्य को महिलाओं के लिये 24×7 हेल्पलाइन एवं तेज़ पुलिस पहुँच सुनिश्चित करने के लिये वैधानिक बदलाव करने की जरूरत है।

वर्तमान में झारखंड सरकार ने इस घटना की पूरी जांच का आदेश दिया है और पुलिस को सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ करने का निर्देश दिया गया है। यह कदम अस्थायी राहत प्रदान करता है, परंतु दीर्घकालिक समाधान के लिए नीतिगत सुधार और सामाजिक जागरूकता दोनों आवश्यक हैं।