केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की E20 फ्यूल से प्रभावित वाहन की पहचान की चुनौती को सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला ने स्वीकार किया, लेकिन गडकरी को पीड़ितों से प्रेस के सामने मिलने की शर्त रखी। यह कदम ईथेनॉल‑ब्लेंडिंग नीति के विरोध को नई दिशा देता है।

नई दिल्ली (09 जुलाई 2026) – केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में 20 % एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) से प्रभावित कम से कम एक वाहन या पीड़ित का नाम सार्वजनिक करने की चुनौती दी थी। इस चुनौती को सामाजिक कार्यकर्ता और इंडस्ट्रियलिस्ट तहसीन पूनावाला ने स्वीकार किया, परन्तु उन्होंने एक स्पष्ट शर्त रखी – गडकरी को इन छह पीड़ितों से मीडिया के सामने मिलना होगा और बातचीत को लाइव‑स्ट्रीम किया जाना चाहिए।

प्रदर्शन का प्रारम्भ और शर्तों का प्रस्ताव

‘टीम भारत’ के बैनर तले पिछले रविवार को दिल्ली के जंतर‑मंतर पर E20 फ्यूल के खिलाफ पहला विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ। पूनावाला ने बताया कि उनका मूल इरादा गडकरी के आवास पर जाकर प्रत्यक्ष रूप से शिकायत दर्ज करवाना था, परंतु दिल्ली पुलिस ने उन्हें चेतावनी दी कि ऐसा करने पर उन्हें हिरासत या गिरफ्तार किया जा सकता है। इस कारण उन्होंने एक वैकल्पिक रास्ता चुना – गडकरी से मिलकर सार्वजनिक रूप से मुद्दे को उजागर करना।

E20 नीति की पृष्ठभूमि और विरोध के कारण

भारत सरकार ने राष्ट्रीय जैव‑ईंधन नीति 2018 के तहत 2030 तक E20 को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने का लक्ष्य रखा था, जिसे 2025 में ही आधिकारिक रूप से लागू कर दिया गया। सरकार का कहना है कि यह कदम ऊर्जा सुरक्षा, आयात निर्भरता कम करने और किसानों को अतिरिक्त आय प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है। हालांकि, कई वाहन मालिकों और उद्योग प्रतिनिधियों का दावा है कि 80 % भारतीय कारें केवल E10 (10 % एथेनॉल) के अनुकूल हैं, और E20 के उपयोग से माइलेज घटता है तथा इंजन व पुर्जों में समस्या उत्पन्न होती है।

पूनावाला की मांगें और संभावित प्रभाव

पूनावाला ने वीडियो में कहा, “हमारे पास ऐसे छह लोग हैं जिनकी गाड़ियों में E20 के कारण गंभीर खराबी आई है। हमें गडकरी के घर नहीं जाना चाहिए, क्योंकि इससे हमें कानूनी परेशानी हो सकती है। या तो दिल्ली पुलिस हमें बैठक की सुविधा दे, या मंत्री हमें एक निर्धारित समय पर मिलें।” यदि गडकरी इस शर्त को स्वीकार करते हैं, तो यह न केवल व्यक्तिगत मामलों को उजागर करेगा बल्कि नीति‑निर्माताओं को सार्वजनिक जांच के सामने लाएगा, जिससे भविष्य में ईंधन ब्लेंडिंग मानकों में संशोधन की संभावना बढ़ सकती है।

सरकार का जवाब और विशेषज्ञों की राय

वहीं, केंद्र सरकार और कई ऑटो‑मोटिव विशेषज्ञों ने कहा है कि E20 ने अब तक किसी भी वाहन को नुकसान नहीं पहुँचाया है। गडकरी ने कहा, “यदि कोई वास्तविक समस्या है तो वाहन मालिक डीलर या मंत्रालय में शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जिसकी उचित जांच की जाएगी।” इस बीच, विरोध समूह का तर्क है कि वास्तविक नुकसान को अनदेखा किया जा रहा है, और सार्वजनिक दबाव के बिना नीति का पुनः मूल्यांकन नहीं हो सकता।

यह मामला न केवल ईंधन नीति की तकनीकी वैधता को परख रहा है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नागरिक सक्रियता और सरकारी जवाबदेही के बीच संतुलन को भी चुनौती दे रहा है। आगे की घटनाएँ यह तय करेंगी कि क्या गडकरी की शर्तें स्वीकार की जाएँगी और क्या यह विरोध आंदोलन को एक नई दिशा प्रदान करेगा।