पंजाब के मोगा में पुलिस स्टेशन पर कम तीव्रता वाला विस्फोट हुआ, जिसके बाद केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बित्तु ने कहा कि पुलिस उन्हें स्थल का निरीक्षण करने से रोक रही थी। कांग्रेस ने इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की मांग की।

पंजाब के मोगा में बुधवार को मोगा सदर पुलिस स्टेशन पर कम तीव्रता वाला विस्फोट हुआ, जिसमें कोई जख्म या संपत्ति का नुकसान नहीं हुआ, परंतु उच्च सतर्कता लागू कर दी गई। इस घटना के बाद केंद्रीय मंत्री राज्य स्तर के मंत्री रवनीत सिंह बित्तु ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि राज्य पुलिस उन्हें ध्वंस स्थल का निरीक्षण करने से रोक रही थी।

बित्तु का विरोध और पुलिस की प्रतिक्रिया

बित्तु ने बीजेडपी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर पुलिस के खिलाफ तीव्र बहस शुरू की और सड़क पर बैठकर विरोध प्रदर्शन किया। बाद में उन्होंने फेसबुक पर पोस्ट करते हुए कहा कि विरोध के बाद पुलिस ने उन्हें "रास्ता दिया" ताकि वह पुलिस स्टेशन तक पहुँच सकें। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, "ऐसे विस्फोट रोज़ होते रहेंगे अगर हम उन्हें छिपाने की कोशिश करेंगे। अब आम जनता को भी स्टेशन का निरीक्षण करने से रोक दिया जा रहा है।" बित्तु ने यह भी कहा कि अब तक 22 ऐसे विस्फोट केवल पुलिस स्टेशनों पर हुए हैं, और यह घटनाएँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंजाब दौरे से पहले हो रही हैं।

पुलिस की आधिकारिक टिप्पणी

मोगा के एसएसपी गुर्बन्स सिंह बैंस ने बताया कि दो संदिग्धों को सीसीटीवी में देखा गया था, जो पुलिस स्टेशन की इमारत की ओर कुछ फेंक रहे थे, परंतु यह अभी स्पष्ट नहीं है कि वह ग्रेनेड था या कोई अन्य वस्तु। उन्होंने यह भी कहा कि 1-2 वाहनों की खिड़कियों को नुकसान हुआ, परंतु कोई जख्म या संपत्ति का बड़ा नुकसान नहीं हुआ। फोरेंसिक जांच शुरू कर दी गई है और अनजान व्यक्तियों के खिलाफ विस्फोटक अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

भ्रम और साइट पर पहुंच

बित्तु के पुलिस स्टेशन जाने के संदर्भ में एसएसपी ने कहा कि प्रारम्भ में भ्रम के कारण पुलिस ने उन्हें अंदर जाने से रोका, क्योंकि यह जांच में बाधा डाल सकता था। बित्तु ने स्पष्ट किया कि वह केवल प्रवेश द्वार तक जाना चाहता था, जिसे अंत में एसएसपी ने व्यक्तिगत रूप से साथ दिया।

राजनीतिक प्रतिध्वनि

पंजाब कांग्रेस के राज्य अध्यक्ष अमरींदर सिंह राजा वारिंग ने इस श्रृंखला के विस्फोटों के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा, "यदि पंजाब में पुलिस स्टेशन सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या भरोसा? मान ने गृह मंत्री और मुख्यमंत्री दोनों के रूप में गंभीर विफलता दिखाई है, और उनका सरकार इन विस्फोटों को हल्के में ले रही है। वह तुरंत इस्तीफा दें।" इस बयान ने राज्य में राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है, विशेषकर आगामी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंजाब दौरे के पूर्व।

भविष्य की संभावनाएँ

विस्फोट की सटीक प्रकृति, संभावित क़लालिस्तान समर्थक समूह की भागीदारी, और जांच में आगे की प्रगति अभी भी अनिश्चित हैं। यदि इस घटना को राजनीतिक लाभ के साधन के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, तो यह पंजाब की सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शी जांच और त्वरित न्याय प्रणाली ही इस तरह के भविष्य की धमाकों को रोकने में मुख्य भूमिका निभाएगी।