टेलेनागा उच्च न्यायालय ने बैंडि संजय कुमार के पुत्र बैंडि भागिरथ को पोकसो अधिनियम के तहत चल रहे आरोपों में नियमित रिहाई दी और 1 लाख रुपये का बांड तथा दो गारंटरों की शर्तें लगाई। मामला 17‑वर्षीय लड़की के कथित यौन उत्पीड़न पर आधारित है, जबकि भागिरथ ने प्रतिवाद में अपहरण व आर्थिक दबाव का दावा किया है।

बैंडि संजय कुमार, जो कि केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में कार्यरत हैं, के पुत्र बैंडि भागिरथ को टेलेनागा उच्च न्यायालय ने 8 जुलाई को पोकसो अधिनियम के तहत चल रहे मामले में रिहाई का आदेश दिया। इस निर्णय के साथ ही अदालत ने 1 लाख रुपये का बांड तथा दो गारंटरों की शर्तें रखी, जिससे भागिरथ को अदालत के निर्देशों के तहत अपने दायित्वों का पालन करने की आवश्यकता होगी।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला 8 मई को पेटबासीराबाद पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ था, जब एक 17‑वर्षीय लड़की की माँ ने पोकसो अधिनियम के अंतर्गत शिकायत दायर की। शिकायत में आरोप था कि भागिरथ ने लड़की के साथ एक संबंध बना कर उसे यौन उत्पीड़न किया। पुलिस ने बाद में पोकसो और भारतीय दण्ड संहिता के गंभीर प्रावधानों को भी जोड़ दिया।

भागिरथ को 16 मई की रात को गिरफ्तार किया गया, जब उच्च न्यायालय ने उसके लिए तात्कालिक संरक्षण नहीं दिया। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में रखा गया, परंतु जून के अंत तक उसके बैचलर ऑफ़ बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) परीक्षा देने के लिए अंतरिम रिहाई भी मिल गई।

कानूनी दावे और प्रतिकथन

भागिरथ ने सभी आरोपों को नकारते हुए एक प्रतिकथन दायर किया, जिसमें उसने दावा किया कि लड़की और उसके परिवार ने उसे शादी के लिए दबाव डाला और बाद में 5 करोड़ रुपये की माँग की। उसने बताया कि उसने 50,000 रुपये का भुगतान भय से किया और परिवार ने आगे 5 करोड़ रुपये की मांग की। इस प्रतिकथन के आधार पर पुलिस ने भी एक FIR दर्ज की।

उपलब्ध तथ्यों के अनुसार दोनों पक्षों के दावे अभी भी जांच के अधीन हैं। इस मामले के सामाजिक और राजनीतिक दोनों ही स्तरों पर गहरा असर है, क्योंकि यह एक सार्वजनिक अधिकारी के परिवार से जुड़ी संवेदनशील घटना है।

प्रभाव और विश्लेषण

पोकसो अधिनियम का उद्देश्य बच्चों को यौन शोषण से बचाना है, और इसके तहत आरोपी को सख्त दण्ड मिल सकता है। भागिरथ को रिहाई मिलने से यह स्पष्ट होता है कि न्यायालय ने पर्याप्त साक्ष्य की कमी को देखते हुए तात्कालिक रिहाई का निर्णय लिया है, परंतु बांड और गारंटरों की शर्तें उसे कानूनी प्रक्रिया से बाहर नहीं निकलने देती।

राजनीतिक दृष्टि से यह घटना बैंडि संजय कुमार के लिए संवेदनशील है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा है कि "कानून सभी पर समान है", परंतु इस तरह के मामले से उनकी छवि पर प्रश्न उठ सकते हैं। इस बीच, समाज में पोकसो मामलों के प्रति जागरूकता बढ़ रही है, और ऐसे मामलों में न्यायालय के निर्णयों पर सार्वजनिक नजरें गहरी हो रही हैं।