विकल्पीय कांग्रेस (VCK) के अध्यक्ष थोल थिरुमा�?वान ने स्पष्ट किया कि उनका दल आधिकारिक रूप से DMK गठबंधन से अलग नहीं हुआ है। उन्होंने तमिलनाडु में राजनीतिक परिपक्वता और भाजपा को मात देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक व्यापक विपक्षी मोर्चे की जरूरत पर बल दिया।
चैनई में आयोजित एक सभा में VCK के प्रमुख थोल थिरुमा�?वान ने कहा कि उनका पार्टियों का गठबंधन "आधिकारिक तौर पर" समाप्त नहीं हुआ है, जबकि मीडिया ने लगातार इस मुद्दे को उठाया है। उन्होंने पत्रकारों को याद दिलाते हुए कहा कि टीवीके नेता एवं मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के खिलाफ भी समान प्रश्न पूछे जाने चाहिए।
पार्टी गठबंधन का इतिहास
विकल्पीय कांग्रेस, जो दलित और अंडर‑प्रतिनिधित्वित वर्गों के हितों को लेकर स्थापित हुई, 1990 के दशक से ही द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के साथ मिलकर काम कर रही है। इस गठबंधन ने तमिलनाडु में कई चुनावों में DMK को महत्वपूर्ण सीटें दिलवाईं, विशेषकर 2021 विधानसभा चुनाव में जहाँ VCK की मदद से DMK ने 59 सीटें जीतीं।
हालिया विवाद और थिरुमा�?वान की प्रतिक्रिया
7 जुलाई को थिरुमा�?वान ने कहा था कि यदि टीवीके‑नेतृत्व वाली सरकार में VCK शामिल हो जाता है, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि वह DMK गठबंधन में नहीं रहेगा। इस बयान पर विपक्षी दलों में तीखा विरोध हुआ, जिसमें MDMK के वैइको ने "नॉबेल पुरस्कार" का उल्लेख किया। थिरुमा�?वान ने इस टिप्पणी को "लोकतंत्र की सुंदरता" कहा, परंतु उन्होंने कहा कि यह टिप्पणी उनके विचारों को नहीं बदलती।
राजनीतिक परिपक्वता की अपील
थिरुमा�?वान ने कहा कि तमिलनाडु में राजनीति को "असंस्कृत" कहा जा रहा है, जहाँ पार्टियों के बीच व्यक्तिगत विरोध के बजाय राष्ट्रीय स्तर पर एकजुटता की आवश्यकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अन्य राज्यों में BJP‑समर्थित दल भी कांग्रेस के साथ दोस्ती रखते हैं, और संसद में विरोधी पार्टियों के नेता हाथ मिलाते हैं, कॉफ़ी पीते हैं और एक‑दूसरे को गले लगाते हैं। ऐसी शिष्टाचार तमिलनाडु में भी अपनाया जाना चाहिए।
भविष्य की राह और राष्ट्रीय विरोधी मोर्चा
थिरुमा�?वान ने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य "INDIA" ब्लॉक बनाना है, जिसमें टीवीके, DMK और अन्य विपक्षी दल शामिल हों, ताकि भाजपा की "साम्प्रदायिक राजनीति" को मात दी जा सके। उन्होंने कहा कि गठबंधन का टूटना हमेशा अनिवार्य नहीं है; पार्टियों के बीच दोस्ती और सहयोग भी संभव है, बशर्ते सभी पक्ष राजनीतिक परिपक्वता दिखाएँ।
इस प्रकार, VCK का आधिकारिक तौर पर DMK से अलग न होना, तमिलनाडु की राजनीति में नई समझ और राष्ट्रीय स्तर पर एकजुटता की आवश्यकता को दर्शाता है।