बेंगलुरु के कई एपीर्टमेंट कॉम्प्लेक्स में बिना एन्हुमरेशन फॉर्म वितरित किए बैंगनी स्टिकर लगे जाने की शिकायतें दर्ज हुई हैं। यह असंगत प्रक्रिया चुनावी रोल की शुद्धता और भरोसे को प्रभावित कर सकती है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • कई अपार्टमेंट में बिना फॉर्म वितरित किए बैंगनी स्टिकर लगाए गए
  • बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं मिला
  • असमान प्रक्रिया से चुनावी डेटा की शुद्धता और समयसीमा पर असर

कर्नाटक के मुख्य चुनावी अधिकारी वी. अंबु कुमार ने विशेष गहन पुनरावृत्ति (SIR) को मतदाता सूची को शुद्ध करने और डेटा की सटीकता बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया है। इस प्रक्रिया में प्रत्येक घर के बाहर दो प्रकार के स्टिकर लगाना अनिवार्य है: सफलतापूर्वक फॉर्म वितरित होने पर वर्गाकार बैंगनी स्टिकर और जब घर बंद हो या फॉलो‑अप की आवश्यकता हो तो गोल लाल स्टिकर।

बेंगलुरु में प्रत्यक्ष रिपोर्ट

बेंगलुरु के बानासवाड़ी, बेन्सन टाउन, बेल्लंदूर और वार्थुर के कई अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में रहवासी बताते हैं कि कुछ ब्लॉ ने बिना एन्हुमरेशन फॉर्म वितरित किए बैंगनी स्टिकर चिपका दिया, जबकि अन्य फ्लैट में फॉर्म वितरित होने के बाद भी कोई स्टिकर नहीं लगाया गया। यह असमानता प्रक्रिया के मानकीकरण की कमी को उजागर करती है।

बूथ लेवल अधिकारियों की दुविधा

कई BLO ने स्वीकार किया कि उन्हें प्रशिक्षण नहीं मिला है और वे उच्च वितरण प्रतिशत हासिल करने के दबाव में काम कर रहे हैं। चुनावी अधिकारियों और राजनीतिक दलों के बूथ‑स्तरीय एजेंटों दोनों से मिलने वाला दबाव, विशेषकर बेंगलुरु शहरी क्षेत्र में, उन्हें फॉर्म वितरित करने के लक्ष्य को तेज़ी से पूरा करने के लिए प्रेरित करता है, चाहे वह प्रक्रिया के नियमों के अनुरूप हो या नहीं।

डेटा की शुद्धता पर संभावित प्रभाव

जैसे‑जैसे SIR का लक्ष्य 90% से अधिक कवरेज हासिल करना है, इन अनियमितताओं से मतदाता सूची में दोहरी प्रविष्टि, गलत पते या संभावित बहिष्करण जैसी त्रुटियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। यदि इस चरण में सुधार नहीं किया गया, तो आगामी विधानसभा या संसद चुनावों में वैध मतदाता पहचान में बाधा आ सकती है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठेंगे।

भविष्य की दिशा

विशेषज्ञों का मानना है कि तत्काल उपायों में BLO के लिए व्यापक प्रशिक्षण, स्पष्ट SOP (Standard Operating Procedure) का प्रसार और फॉर्म व स्टिकर वितरण के लिए डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली का कार्यान्वयन शामिल होना चाहिए। इसके अलावा, जनता को प्रक्रिया के बारे में जागरूक करने के लिए व्यापक सूचना अभियान आवश्यक है, ताकि अनधिकृत स्टिकर चिपकाने जैसी गड़बड़ियों को रोका जा सके।