सोनाम वांगचुक ने 21वें दिन अपने अनिश्चितकालीन उपवास में कहा कि उनकी भूख स्थिर हो गई है और किसी भी प्राधिकरण द्वारा उन्हें हटाना संविधान के अधिकार का उल्लंघन होगा। उन्होंने शिक्षा मंत्री के पदत्याग और परीक्षा irregularities की जांच की मांग की।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- सोनाम वांगचुक ने बताया कि उनका उपवास अब स्थिर है और स्वास्थ्य गंभीर नहीं है।
- वांगचुक ने यह कहा कि उन्हें हटाना संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत उनका अधिकार तोड़ेगा।
- CJP ने 20 जुलाई को संसद में मार्च करने की योजना जारी रखी है।
जंतर मन्तर, नई दिल्ली – 21वें दिन, कॉकरॉच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख विरोधी सोनाम वांगचुक ने अपने अनिश्चितकालीन भूख प्रतिबंध (हंगर स्ट्राइक) के बारे में बताया कि उनकी भूख अब स्थिर हो गई है। उन्होंने कहा, “पहले के दिन कठिन थे, लेकिन अब शरीर ने इस अवस्था को स्वीकार कर लिया है, और मैं ठीक महसूस कर रहा हूँ।”
पृष्ठभूमि और कारण
वांगचुक, जो एक शैक्षिक कार्यकर्ता और जलवायु सक्रियकर्ता हैं, ने 28 जून को जंतर मन्तर में CJP के साथ जुड़कर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पदत्याग और परीक्षा irregularities की जांच की मांग की। यह आंदोलन छात्रों के आत्महत्या की घटनाओं के बाद तेज़ी से राष्ट्रीय स्तर पर फैल गया, जहाँ 20 छात्रों ने नेट (NEET‑UG) रद्दीकरण के बाद आत्महत्या की थी।
स्वास्थ्य की स्थिति और सरकार की प्रतिक्रिया
वांगचुक ने स्पष्ट किया कि वह स्वेच्छा से इस स्थल पर मौजूद हैं और “कोई भी प्रशासनिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए” क्योंकि उनका स्वास्थ्य “स्थिर” है। उन्होंने कहा, “यदि सरकार मुझे हटाने की कोशिश करती है तो यह हमारे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होगा।” CJP के प्रवक्ता अशुतोष रंका ने बताया कि वांगचुक ने अब तक लगभग 7.5 किलो वजन घटाया है, लेकिन रक्त शर्करा स्तर स्थिर है और उनका मेडिकल टीम लगातार निगरानी कर रही है।
राजनीतिक प्रभाव और आगे की योजना
वांगचुक ने कहा कि शिक्षा मंत्री के पदत्याग से युवा वर्ग का विश्वास पुनः स्थापित हो सकता है, और मौसमी सत्र के दौरान यह कदम सरकार को “राजनीतिक रूप से लाभदायक” बना सकता है। CJP ने 20 जुलाई को संसद में शांति मार्च करने का फैसला किया है, जिसमें छात्र, अभिभावक और नागरिकों को भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि सरकार ने अभी तक कोई संवाद नहीं किया, तो CJP ने चेतावनी दी है कि वह अन्य उपायों के साथ आगे बढ़ेगा। इस प्रकार, इस विरोध का परिणाम भारतीय लोकतंत्र की स्थिरता, शैक्षिक नीति और युवा वर्ग की सहभागिता के लिए एक निर्णायक मोड़ बन सकता है।