महिला संगठनों ने संसद और राज्य विधानसभाओं में 33% आरक्षण का त्वरित कार्यान्वयन माँगा है। उन्होंने जनगणना व सीमांकन से आरक्षण को अलग करने के लिए संवैधानिक संशोधन का आग्रह किया है, जबकि देश भर में 20‑21 जुलाई को धarnas का आयोजन किया जाएगा।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • संसद की वर्तमान शक्ति पर 33% महिलाओं की आरक्षण को तुरंत लागू किया जाए
  • आरक्षण को जनगणना और सीमांकन से अलग करने हेतु संवैधानिक संशोधन बिल पेश किया जाए
  • 20‑21 जुलाई को राष्ट्रीय स्तर पर धarnas और सतत प्रदर्शन आयोजित किए जाएँ

राष्ट्रीय महिला आरक्षण गठबंधन, जिसमें ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वीमेन एसोसिएशन, एनएफआईडब्ल्यू, वाईडब्ल्यूसीए और कई अन्य संस्थाएँ शामिल हैं, ने इस वर्ष की मानसून सत्र से पहले एक सशक्त मांग रखी है। उन्होंने संसद और राज्य विधानसभाओं में वर्तमान सीटों की संख्या पर 33% आरक्षण का “बिना शर्त और त्वरित” कार्यान्वयन माँगा है, जिससे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में ऐतिहासिक परिवर्तन आएगा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

1996 में पहली बार महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का बिल संसद में पेश किया गया, लेकिन वह कई वर्षों तक टेबल पर ही फँसा रहा। 2023 में अंतिम बार पारित Women’s Reservation Act ने आरक्षण को जनगणना और सीमांकन के साथ बाँध दिया, जिससे कार्यान्वयन को आगे की प्रक्रिया तक टाला गया। गठबंधन का कहना है कि यदि यह शर्त नहीं लगाई जाती तो वर्तमान लोकसभा में लगभग 33% सांसद महिलाएँ होते।

वर्तमान स्थिति और आकड़े

आज केवल 14% सांसद महिलाएँ हैं, जबकि राज्य विधानसभाओं में यह आंकड़ा 10% से भी नीचे है। यह आंकड़े न केवल लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व में असमानता दिखाते हैं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक विकास में भी बाधा बनते हैं। गठबंधन ने 1500 से अधिक हस्ताक्षर एकत्र किए हैं, जिनमें शशि‍ला टैगोर, मलिक़ा सराभाई, ज़ोया हसन आदि प्रमुख हस्तियों के नाम शामिल हैं।

नीति की माँगें

गठबंधन ने सरकार से तत्काल संवैधानिक संशोधन बिल पेश करने का आग्रह किया है, जिससे आरक्षण को जनगणना एवं सीमांकन से अलग किया जा सके। साथ ही उन्होंने विपक्षी दलों से भी अनुरोध किया है कि वे इस मुद्दे को संसद में दृढ़ता से उठाएँ और महिलाओं के लिए आरक्षण को बिना किसी शर्त के लागू करने की दिशा में समर्थन दें।

आगामी कार्रवाई

20‑21 जुलाई को देश भर में संयुक्त धarnas का आयोजन किया जाएगा, जबकि दिल्ली में जंतर मंतर पर लगातार धarnas आयोजित रहेगा। इसके अतिरिक्त, संसद के भीतर महिलाओं के सांसदों के साथ एक राष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा, जिससे नीति निर्माताओं को प्रत्यक्ष संवाद का मंच मिल सके।

इस आंदोलन का लक्ष्य न केवल 33% आरक्षण को वास्तविकता में बदलना है, बल्कि महिलाओं के लिए राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ठोस कदम उठाना भी है।