केरल हाई कोर्ट ने वायनाड में हुए विनाशकारी लैंडस्लाइड के पीड़ितों को तत्काल एक्स‑ग्रेशिया भुगतान और शवों की त्वरित सुपुर्दगी का आदेश दिया, साथ ही टनल प्रोजेक्ट में काम जारी रहने के कारणों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • केरल सरकार को लैंडस्लाइड पीड़ितों को तुरंत एक्स‑ग्रेशिया भुगतान करने का आदेश।
  • ट्रेनिंग टनल परियोजना में काम रोकने के बाद भी श्रमिकों की उपस्थिति पर सरकार को जवाब देना होगा।
  • शवों की त्वरित पहचान और परिवारों को सुपुर्दगी सुनिश्चित करने के लिए विशेष निर्देश।

केरल हाई कोर्ट ने शुक्रवार को वायनाड में 7 जुलाई को हुए लैंडस्लाइड के बाद राज्य सरकार को दो प्रमुख आदेश दिए। प्रथम, मृतकों के परिजनों को एक्स‑ग्रेशिया (अतिरिक्त) मुआवजा तुरंत जारी करने तथा घायल लोगों को चिकित्सा खर्चों का भुगतान शीघ्रता से करने का निर्देश। द्वितीय, पीड़ितों के शवों को परिवारों को तुरंत सौंपने की प्रक्रिया तेज करने का आदेश। यह आदेश कोर्ट के स्वयं‑मोटू (suo motu) मामले के तहत जारी किए गए थे, जो 2024 में मुण्डक्काई और चूराल्माला गांवों में हुई समान लैंडस्लाइड के बाद शुरू हुए थे।

पृष्ठभूमि और कानूनी पहलू

वायनाड, जो केरल के पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित है, अक्सर भारी वर्षा और भू-स्खलन की घटनाओं से ग्रस्त रहता है। 2024 में दो बड़े लैंडस्लाइड ने 200 से अधिक जीवितों को मार गिराया था, जिससे राज्य सरकार को आपदा प्रबंधन में कई कमियों का सामना करना पड़ा। इस संदर्भ में हाई कोर्ट ने प्राकृतिक आपदाओं की रोकथाम और प्रबंधन हेतु एक व्यापक दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया था।

टनल परियोजना पर सवाल

कोर्ट ने विशेष रूप से अनाक्कोम्पॉयिल‑मेप्पड़ी टनल परियोजना की ओर इशारा किया। राज्य सरकार ने बताया कि 25 मई को सभी बाहरी कार्य रोक दिए गए थे और 5 जुलाई को सभी कार्यों को पूर्णतः बंद कर दिया गया। फिर भी, कोर्ट ने पूछा, "तो फिर कामगार साइट पर क्या कर रहे थे?" इस प्रश्न का उत्तर सरकार को अगले सुनवाई में देना होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि अस्थायी रूप से टनल परियोजना के खाते से ही मुआवजा और चिकित्सा खर्च निकाले जा सकते हैं, जबकि आगे की पुनः वसूली की प्रक्रिया बाद में तय की जाएगी।

रिस्क्यू कार्य और चुनौतियां

स्थलीय अधिकारियों ने बताया कि गहरी कीचड़ और गंदगी के कारण कदर कुत्ते भी शव नहीं ढूँढ पाए, जिससे बचाव दल को हाथ से खोज करनी पड़ी। यह दर्शाता है कि कठिन भू-भौतिक परिस्थितियों में मानवीय बचाव कार्य कितना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

आगे की राह

केरल हाई कोर्ट ने सरकार को शीघ्र मुआवजा, त्वरित चिकित्सा सहायता और शवों की त्वरित सुपुर्दगी सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट समयसीमा दी है। साथ ही, टनल परियोजना में कार्य रोकने के बाद भी श्रमिकों की उपस्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है, जिससे भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने में मदद मिल सकेगी।