केरल सरकार द्वारा महिलाओं और ट्रांसजेंडर लोगों के लिये मुफ्त यात्रा योजना शुरू करने से निजी बस ऑपरेटरों में बड़े पैमाने पर हड़ताल की चेतावनी दी गई है। राज्य रूट ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (KSRTC) की वित्तीय स्थिति पहले ही कमजोर है, जबकि निजी बसों का फ्लीट घट रहा है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • केरल सरकार ने 15 जून को महिलाओं के लिये मुफ्त यात्रा योजना शुरू की।
  • निजी बस ऑपरेटरों ने आर्थिक नुकसान के कारण 20 जुलाई से हड़ताल की घोषणा की।
  • KSRTC का घाटा 2024-25 में लगभग ₹21,000 करोड़ तक पहुंचा, और नई योजना से इसकी वित्तीय बोझ बढ़ेगा।

केरल में 15 जून को लागू की गई प्रियदर्शिनी बस योजना ने महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को राज्य‑स्वामित्व वाली बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी। इस कदम को सामाजिक समानता की दिशा में सराहा गया, परन्तु इसने राज्य एवं निजी दोनों सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क में वित्तीय तनाव पैदा कर दिया है।

निजी बस ऑपरेटरों की प्रतिक्रिया

केरल के निजी बस संघ के महासचिव टी. गोपीनाथन ने बताया कि निजी बसें राज्य की तुलना में लगभग 70% मार्गों को कवर करती हैं, जबकि KSRTC केवल एक‑तीसरा हिस्सा संभालता है। वह दावा करते हैं कि सरकार मोटर वाहन विभाग का प्रयोग करके निजी बस मालिकों पर दबाव बना रही है, जिससे वे आर्थिक रूप से अस्थिर हो रहे हैं। निजी फ्लीट 2018 में 12,900 से घटकर अब लगभग 7,000 हो गया है, और नई योजना के बाद 500 से अधिक बसें बंद हो गई हैं।

राज्य परिवहन निगम की वित्तीय स्थिति

KSRTC प्रतिदिन लगभग 2 मिलियन यात्रियों को ले जाता है और 1.8 मिलियन से अधिक टिकट बेचता है, फिर भी 2024‑25 वित्तीय वर्ष के अंत में इसका घाटा लगभग ₹21,000 करोड़ दर्ज किया गया। मुफ्त यात्रा योजना के तहत 3,000 से अधिक ‘सामान्य’ बसों में यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है, जिससे अतिरिक्त राजस्व की कमी और भी स्पष्ट होगी। सरकार ने KSRTC को अतिरिक्त आय के स्रोत खोजने का निर्देश दिया, जिसमें टिकट के पीछे विज्ञापन शामिल है।

भविष्य में संभावित परिदृश्य

पूर्व परिवहन मंत्री के.बी. गणेश कुमार ने चेतावनी दी है कि यह योजना न केवल निजी बस मालिकों बल्कि KSRTC को भी आर्थिक रूप से कमजोर कर सकती है। अगर राज्य की सहायता नहीं की गई तो सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क का ढांचा एक ही झटके से ध्वस्त हो सकता है, जिससे लगभग 28,000 परिवार अपनी आय का स्रोत खो सकते हैं। सार्वजनिक परिवहन विशेषज्ञ पी. कृष्णकुमार ने सुझाव दिया कि सरकार को निजी बसों में भी समान सुविधा प्रदान करनी चाहिए या वैकल्पिक कर राहत देनी चाहिए, ताकि संतुलित प्रतिस्पर्धा बनी रहे।

जुलाई 20 को निजी ऑपरेटरों ने तिरुवनंतपुरम में सरकार के सचिवालय से हड़ताल शुरू करने की घोषणा की है, जो अनिश्चितकालीन रहने की संभावना है। यह आंदोलन केरल के विभिन्न जिलों—कोट्टायम, पथनामथिट्टा, इडुक्की और कसर्गोड—में पहले भी छोटे‑छोटे प्रदर्शन के रूप में देखा गया था।