कांग्रेस के जयराम रामेश ने न्यूज़ीलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री डेविड लैंग के भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को पुनर्स्थापित करने के योगदान को उजागर किया, जबकि मोदी‑लक्सन की रणनीतिक साझेदारी की घोषणा को ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में रखा।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- डैविड लैंग ने 1980 के दशक में भारत‑न्यूज़ीलैंड संबंधों को पुनर्जीवित किया
- न्यूज़ीलैंड ने भारत के डेयरी सेक्टर और AIIMS की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
- मोदी‑लक्सन ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को ₹35,000 करोड़ तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा
नई दिल्ली (12 जुलाई, 2026) – कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रामेश ने शनिवार को न्यूज़ीलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री डैविड लैंग के भारत‑न्यूज़ीलैंड संबंधों को पुनर्स्थापित करने के ऐतिहासिक योगदान को याद किया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफ़र लक्सन ने दो देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की।
डैविड लैंग का राजनयिक सफर
डैविड लैंग, जिन्होंने 1984 से 1989 तक न्यूज़ीलैंड के प्रधान मंत्री के रूप में कार्य किया, अपने पदभार संभालने के बाद प्रथम विदेश दौरा भारत का किया। इस दौरे के दौरान उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ गहरी समझ बनायी और बाद में राजीव गांधी के साथ भी व्यक्तिगत बंधन स्थापित किया। रामेश के अनुसार, लैंग ने 1950 के दशक में स्थापित उत्पादक द्विपक्षीय संबंधों को पुनः सक्रिय किया, जिसमें न्यूज़ीलैंड ने भारत के डेयरी उद्योग के विकास और नई दिल्ली में AIIMS (ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) की स्थापना में सहयोग दिया।
डेयरी सेक्टर और AIIMS में न्यूज़ीलैंड का योगदान
डॉ. वेरघीस कुरीयेन, जिन्हें भारत की “सफ़ेद क्रांति” का जनक कहा जाता है, ने 1952‑53 में न्यूज़ीलैंड के एक सरकारी फेलोशिप के तहत देश का दौरा किया। यह यात्रा उनके बाद के कार्यों को दिशा देती रही, जिससे भारत में डेयरी उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। इसी दौर में न्यूज़ीलैंड ने तकनीकी समर्थन, प्रौद्योगिकीय हस्तांतरण और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय डेयरी को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया। AIIMS के निर्माण में भी न्यूज़ीलैंड की विशेषज्ञता और वित्तीय सहायता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नई दिशा प्राप्त हुई।
रणनीतिक साझेदारी की नई दिशा
प्रधानमंत्री मोदी और लक्सन ने दो देशों के बीच संबंधों को “रणनीतिक साझेदारी” तक ऊँचा उठाने का संकल्प लिया। इस समझौते में 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को ₹35,000 करोड़ तक दोगुना करने, इंडो‑पैसिफिक समुद्री सहयोग को सुदृढ़ करने, और दोनों देशों की सेनाओं के बीच लॉजिस्टिक्स समर्थन समझौते को लागू करने का लक्ष्य तय किया गया है। साथ ही, समुद्री सुरक्षा संवाद की स्थापना भी इस ढाँचे का हिस्सा है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
भविष्य की संभावनाएँ
जयराम रामेश ने कहा कि लैंग के प्रयासों की याद दिलाने से वर्तमान रणनीतिक सहयोग के महत्व को समझना आसान होगा। उनका मानना है कि इतिहास से सीख लेकर दो देशों के बीच आर्थिक, वैज्ञानिक और सुरक्षा संबंधों को और गहरा किया जा सकता है, जिससे दोनों राष्ट्रों के नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ होगा।