भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए ऑनलाइन फॉर्म 6 में एक नया घोषणा पत्र जोड़ा है। इसमें आवेदकों से उनके माता-पिता के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) की स्थिति पूछी जा रही है, जिसने एक नया कानूनी विवाद खड़ा कर दिया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • चुनाव आयोग ने ऑनलाइन फॉर्म 6 में एक नया घोषणा पत्र जोड़ा है, जिसमें माता-पिता के SIR विवरण मांगे गए हैं।
  • जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 28 के तहत केवल केंद्र सरकार के पास ही इन नियमों और फॉर्मों को संशोधित करने का अधिकार है।
  • हाल ही में चलाए गए SIR अभियान के तहत 10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची से 5.58 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं।

भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया में एक बड़ा और गुप्त बदलाव किया है। आयोग के ऑनलाइन पोर्टल 'ECINET' पर नए मतदाताओं के लिए उपलब्ध फॉर्म 6 (Form 6) में अब एक नया घोषणा पत्र जोड़ा गया है। इस नए हिस्से में आवेदकों से उनके माता-पिता के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी जा रही है। दिलचस्प बात यह है कि इस बदलाव के लिए आधिकारिक वैधानिक फॉर्म में कोई संशोधन नहीं किया गया है।

कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन और विवाद

इस बदलाव ने गंभीर कानूनी और प्रक्रियात्मक सवाल खड़े कर दिए हैं। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (Representation of the People Act, 1950) की धारा 28 के अनुसार, मतदाता पंजीकरण नियमों या फॉर्म में किसी भी प्रकार का बदलाव करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार (कानून मंत्रालय) के पास है। चुनाव आयोग स्वतंत्र रूप से इन फॉर्मों में कोई बदलाव नहीं कर सकता। पूर्व चुनाव अधिकारियों के अनुसार, आयोग अपनी मर्जी से फॉर्म में एक 'कॉमा' भी नहीं जोड़ सकता। इसके लिए बकायदा संसद या कानून मंत्रालय द्वारा अधिसूचना जारी की जानी अनिवार्य है, जो इस मामले में नहीं किया गया।

करोड़ों मतदाताओं के नाम हटाने का पृष्ठभूमि संदर्भ

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब पिछले साल शुरू हुए चुनाव आयोग के SIR अभियान के तहत 10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों से 5.58 करोड़ से अधिक नाम हटा दिए गए हैं। पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में स्थिति और भी गंभीर रही, जहां करीब 27 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए, जिसके कारण वे अप्रैल के चुनावों में मतदान नहीं कर सके। अब नए आवेदकों से उनके माता-पिता के SIR की जानकारी मांगना, उन युवाओं के लिए परेशानी का सबब बन सकता है जिनके माता-पिता के नाम हाल ही में हटाए गए हैं।

ऑनलाइन पोर्टल की जटिलताएं

यद्यपि इस नए हिस्से को पोर्टल पर 'अनिवार्य' (Mandatory) के रूप में चिह्नित नहीं किया गया है, लेकिन इसके बिना आवेदक फॉर्म जमा करने की प्रक्रिया में आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। आवेदकों को तीन विकल्प दिए गए हैं: पहला, उनका नाम पिछले SIR में था; दूसरा, उनके माता-पिता का नाम पिछले SIR में था; या तीसरा, दोनों में से किसी का नाम पिछले SIR में नहीं था। यदि कोई तीसरा विकल्प चुनता है, तो उसके आवेदन का क्या होगा, इस बारे में पोर्टल पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।