प्रवर्तन निदेशालय ने तृणमूल कांग्रेस नेता सुजित बोस पर नगरपालिका भर्ती घोटाले से मिली अवैध धनराशि को अपने रेस्तरां और बार‑लॉन्ज में रूट करने का आरोप लगाया है, जिससे राजनीतिक भ्रष्टाचार पर नई जांच की लहर आई है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सुझित बोस ने भर्ती घोटाले के नकद को अपने रेस्तरां में रूट किया
  • धन का उपयोग नई बार‑लाउंज और बैंकेट्स में किया गया
  • ED ने कोलकाता में विशेष PMLA कोर्ट में चार्जशीट दायर की

कॉलकत्ता स्थित विशेष PMLA कोर्ट में 9 जुलाई को दायर की गई नई चार्जशीट में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता सुजित बोस पर नगरपालिका भर्ती घोटाले से मिली अवैध धनराशि को अपने रेस्तरां और अन्य आतिथ्य संस्थानों में रूट करने का आरोप लगाया है।

घोटाले की पृष्ठभूमि

बोस, जो पूर्व में फायर एवं इमरजेंसी सर्विसेज मंत्री तथा दक्षिण डुमडुम नगरपालिका के उपाध्यक्ष रहे, 2014 से 2022 के बीच 340 उम्मीदवारों की नियुक्तियों में हस्तक्षेप कर 284 को नियुक्त किया। इन नियुक्तियों के बदले मिली धनराशि को “चाइनीज़ क्विसीन रेस्तरां” के नाम पर नकद बिक्री के रूप में दर्ज किया गया, जबकि रेस्तरां का व्यापार सीमित था।

धन का पुनरावंटन

ED के अनुसार, इस रेस्तरां से प्राप्त नकद को श्री वेंकटेश बैंकेट्स और स्पेशलिटी ढाबा LLP जैसे बैंकेट एवं बार‑लाउंज में पूंजी योगदान और बिना सुरक्षा वाले ऋण के रूप में पुनः निवेश किया गया। शेल कंपनियों एवं व्यक्तिगत उधारदाताओं से अतिरिक्त धन लेकर संपत्ति खरीदी गई, जिसे बाद में “बोगस” नकद बिक्री के माध्यम से वापस चुकाया गया।

कानूनी पहलू और राजनीतिक प्रभाव

बोस पर आरोप है कि उन्होंने नगरपालिका भर्ती प्रक्रिया को विकृत कर सार्वजनिक धन का शोषण किया और सीधे अपने लाभ के लिए कई फ्लैट खरीदे। इसके अलावा, आईएएस अधिकारी ज्योतिषमन चट्टोपाध्याय ने भी इस स्कीम में अपना पददुर्व्यवहार किया, जिससे कई अनधिकृत नियुक्तियों को वैध बनाने में मदद मिली। बोस ने इन सभी आरोपों को अस्वीकार किया है, परन्तु उनका राजनीतिक भविष्य अब अनिश्चित है।

भविष्य की संभावनाएँ

यह मामला पहले भी 2025 में ए.एस. सिल के खिलाफ दायर किए गए चार्जशीट के बाद दोबारा उभरा है, जो नगरपालिका प्रश्नपत्र निर्माण कंपनी का प्रमुख था। इस बार, जांच एजेंसी ने धन के प्रवाह को अधिक विस्तृत रूप से दिखाया है, जिससे भविष्य में अधिक राजनेताओं के खिलाफ समान कार्रवाई की संभावना बढ़ रही है।