राजामहेंद्रवाराम नगर निगम 48 करोड़ की स्थानीय निधि इस्तेमाल करेगा, जबकि केंद्र से अतिरिक्त 580 करोड़ जुटाने की मांग की गई है। 2027 में होने वाले गोडावरी पुश्करम के लिए बुनियादी ढांचे को पहले से तैयार करने की योजना तैयार है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- ₹580 करोड़ की नई योजना
- 2027 पुश्करम के लिए बुनियादी ढांचा
- राजामहेंद्रवाराम में 48 करोड़ की स्थानीय निधि
राजामहेंद्रवाराम नगर निगम (RMC) ने घोषणा की है कि वह अपनी उपलब्ध 48 करोड़ रुपये की निधि का उपयोग करके, केंद्र सरकार के विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लगभग 580 करोड़ रुपये जुटाएगा, ताकि गोडावरी पुश्करम 2027 के लिये आवश्यक शहरी बुनियादी ढांचा तैयार किया जा सके। यह कदम पिछले 2015 के पुश्करम के अनुभव से सीखते हुए समय पर कार्य पूर्ण करने की रणनीति को दर्शाता है।
पुश्करम का ऐतिहासिक महत्व
गोडावरी पुश्करम एक पवित्र स्नान उत्सव है, जो हर 12 वर्ष में दो बार आयोजित होता है। 2015 के पुश्करम में 4.8 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र जल में स्नान किया था, और सबसे व्यस्त दिन में लगभग 60 लाख लोग उपस्थित थे। राज्य सरकार 2027 के पुश्करम में लगभग 10 करोड़ श्रद्धालुओं की अपेक्षा कर रही है, जिसमें एक मिलियन से अधिक लोग प्रमुख दिन में स्नान करेंगे।
विस्तृत बुनियादी ढांचा योजना
नियोजन में 15,000 सफाई कर्मियों की तैनाती, 4,000 अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों, और भीड़ प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीकी उपाय शामिल हैं। प्रमुख परियोजनाओं में 15 करोड़ रुपये का भूमिगत केबल नेटवर्क, 22 करोड़ रुपये का नदी किनारे विकास, तथा 97 करोड़ रुपये के अखंडा गोडावरी प्रोजेक्ट के तहत हैवलॉक ब्रिज पर वाकिंग ट्रैक बनाना शामिल है। इन सभी कार्यों को पिछले पुश्करम की तुलना में एक साल पहले शुरू किया गया है, जिससे समय की पर्याप्त पूर्ति का आश्वासन मिलता है।
वित्तीय रणनीति और भविष्य की राह
रिपोर्ट के अनुसार, RMC आयुक्त राहुल मीणा और राजामहेंद्रवाराम शहरी विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष बड्डू वेंकटरामण चौधरी ने ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (TDR) बांड के माध्यम से फंड जुटाने की संभावना का अध्ययन करने का निर्देश दिया। यह वित्तीय मॉडल न केवल राज्य के लिए अतिरिक्त राजस्व स्रोत उत्पन्न करेगा, बल्कि स्थानीय विकास को सुदृढ़ करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सफल रही, तो भविष्य में अन्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए भी इसी तरह की मॉडल अपनाई जा सकती है।
समग्र प्रभाव
ऐसे बड़े पैमाने के धार्मिक आयोजन में बुनियादी ढांचा सुधार न केवल श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को बढ़ाता है, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक विकास, पर्यटन, और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। 2027 का पुश्करम, यदि योजना के अनुसार कार्यान्वित हो, तो आंध्र प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती देगा और राष्ट्रीय स्तर पर भारत की धार्मिक पर्यटन क्षमताओं को नई दिशा प्रदान करेगा।