जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने संसद की मानसून सत्र की पहली दिन जंतर मंतर पर प्रार्थना करने के लिए सभी दलों को बुलाया और केन्द्र सरकार से राज्यत्व पर देरी को ‘धैर्य’ के रूप में दिखाने की निंदा की। उन्होंने एचसीसी के निर्णयों और भाजपा के ‘सुरक्षा’ दावे पर सवाल उठाए।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- ओमर अब्दुल्ला ने ज&क के राज्यत्व में केन्द्र की देरी को ‘धैर्य’ के रूप में प्रस्तुत करने पर तीखी आलोचना की।
- वह जंतर मंतर पर 20 जुलाई को होने वाले विरोध के लिए सभी ज&क दलों को एकजुट होने का आह्वान करते हैं।
- उन्हें लगता है कि भाजपा की ‘विशेष स्थिति’ की नीति ने ज&क की राजनीतिक पहचान को कमजोर किया है।
जम्मू‑कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने 11 जुलाई को अपने कार्यकाल के दौरान एक महत्वपूर्ण बयान दिया, जिसमें उन्होंने राज्यत्व के प्रश्न पर केन्द्र सरकार की ‘उपयुक्त समय’ नीति को “धैर्य को कमजोरी के रूप में समझना” कहा। यह बयान ज&क की राजनीतिक परिस्थिति के बदलते परिदृश्य को दर्शाता है, जहाँ 2024 के विधानसभा चुनाव और 2026 के संसद सत्र के बीच तनाव बढ़ रहा है।
राज्यत्व और संविधान का इतिहास
केंद्र सरकार ने 2019 में 370वाँ अनुच्छेद हटाने के बाद ज&क को ‘विशेष स्थिति’ के अंतर्गत रखा। 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यत्व बहाली के तीन चरण—सीमा निर्धारण, विधानसभा चुनाव और राज्यत्व—की रूपरेखा तय की। परंतु ओमर अब्दुल्ला का कहना है कि सीमांकन केवल ‘एक पार्टी के लाभ के लिए’ किया गया, जिससे भाजपा को छह सीटें मिलीं जबकि एनसी को केवल एक।
एनसी का ‘धैर्य’ और ज&क की राजनीतिक आवाज़
एनसी ने 1990 से अब तक ज&क में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन नहीं किये थे, पर 26 जुलाई को बेगम अकबर जहान अब्दुल्ला की 26वीं पुण्यतिथि पर हजारों कार्यकर्ताओं ने नसीम बाग में एक विशाल रैली आयोजित की। इस कार्यक्रम ने एनसी की ‘धैर्य’ नीति को चुनौती दी और राज्यत्व पर केन्द्र की नीतियों के प्रति असंतोष को उजागर किया।
भाजपा की ‘विशेष स्थिति’ नीति और ज&क की प्रतिक्रिया
ओमर अब्दुल्ला ने भाजपा को ‘एक देश और एक संविधान’ के नाम पर ज&क के विशेष अधिकारों को समाप्त करने के लिए दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि ‘भाजपा के नेताओं को यह बताना चाहिए कि राज्यत्व तभी मिलेगा जब वे सत्ता में आएँ’, और यह स्पष्ट किया कि ज&क की राजनीतिक परिभाषा अब ‘पार्टी की शक्ति’ पर निर्भर नहीं होनी चाहिए।
जंतर मंतर पर प्रस्तावित विरोध और भविष्य की दिशा
मुख्यमंत्री ने जंतर मंतर पर 20 जुलाई को होने वाले विरोध के लिए सभी ज&क दलों को एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि केन्द्र सरकार ज&क में 2024 के चुनावों को अनिवार्य करती है, तो यह ‘केंद्र की नीतियों के प्रति ज&क का प्रतिरोध’ को दर्शाता है। इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय निकायों के चुनावों को ‘उपयुक्त समय’ पर होने की बात कही।
विश्लेषण
ओमर अब्दुल्ला का बयान ज&क की राजनीतिक जटिलताओं को उजागर करता है, जहाँ केंद्रीय और राज्य सरकार के बीच सत्ता, पहचान और लोकतंत्र पर गहन विवाद जारी है। उनकी ‘धैर्य’ नीति के बावजूद, ज&क के लोग अब ‘जंतर मंतर’ पर आवाज़ बुलंद करने के लिए तैयार हैं, जो भविष्य में नीति परिवर्तनों की मांग को और तेज़ कर सकता है।