पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असिम मुनीर को जनसंख्या नियंत्रण समिति में शामिल किया गया है, जिससे सरकार की जनसंख्या नीति में सेना का प्रभाव बढ़ेगा। स्वास्थ्य मंत्री ने इस कदम को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया और राष्ट्रीय वित्त आयोग की पुरानी फॉर्मूला में सुधार का प्रस्ताव रखा।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • असिम मुनीर को जनसंख्या नियंत्रण समिति में शामिल किया गया
  • राष्ट्रीय वित्त आयोग (NFC) की फॉर्मूला में जनसंख्या घटाने वाले प्रांतों को कम धन नहीं मिलेगा
  • सरकार ने गर्भनिरोधक पर कर मुक्तियों और सार्वजनिक जागरूकता पर जोर दिया

पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असिम मुनीर को प्रधानमंत्री शह्बाज़ शरिफ द्वारा गठित एक उच्च‑स्तरीय समिति में शामिल किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य देश में तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करना है। यह कदम, जिसे डॉन ने रिपोर्ट किया, सेना की पारम्परिक रक्षा भूमिका से परे उसकी नीति‑निर्माण में बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि और रणनीतिक महत्व

पिछले दशकों से पाकिस्तान ने सेना को राष्ट्रीय सुरक्षा के अलावा विदेशी नीति, अर्थव्यवस्था और विकास परियोजनाओं में प्रमुख भूमिका दी है। अब मुनीर की भागीदारी जनसंख्या नीति तक विस्तारित हो रही है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा के समान महत्व देती है। देश वर्तमान में विश्व का पाँचवाँ सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है और 2030 तक इंडोनेशिया को पीछे छोड़ कर चौथा स्थान हासिल कर सकता है।

समिति की कार्यवाही और प्रमुख प्रस्ताव

फेडरल स्वास्थ्य मंत्री सैयद मुस्तफा कमाल ने दो सीनेट समितियों के संयुक्त सत्र में बताया कि समिति में वित्त, योजना और स्वास्थ्य के वरिष्ठ मंत्रियों के साथ असिम मुनीर भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय वित्त आयोग (NFC) की मौजूदा फॉर्मूला में जनसंख्या घटाने वाले प्रांतों को कम निधि मिलती है, जिससे प्रांतों को जनसंख्या नियंत्रण में बाधा आती है। इस कारण फॉर्मूला में जनसंख्या घटाने वाले घटक को 82% से घटाकर 50% करने का प्रस्ताव रखा गया है।

गर्भनिरोधक तक पहुंच और सार्वजनिक भागीदारी

कमाल ने कहा कि contraceptive उत्पादों पर अब कर मुक्तियां दी गई हैं, जिससे 6.7 मिलियन वार्षिक जन्मों में से लगभग 1.5 मिलियन को घटाया जा सकता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए सरकार की पहल के साथ-साथ नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

भविष्य की दिशा

समिति ने कानून, धार्मिक विद्वानों और अन्य संसद समितियों के साथ परामर्श करके एक सर्वसम्मति‑आधारित रणनीति तैयार करने का आदेश दिया है। अगले दिनों में और भी कई संयुक्त बैठकें होंगी, जहाँ प्रांतीय और संघीय स्तर पर जिम्मेदारी के वितरण को लेकर चर्चा जारी रहेगी।