कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने केरल के मुख्यमंत्री को लिखित अनुरोध किया, जिसमें केरल के किसी भी इच्छुक मंदिर से मादा हाथी को मूकांबिका मंदिर में दान करने की बात कही गई। यह अनुरोध राज्य‑स्तर के हाथी स्थानांतरण नियमों के तहत किया गया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कर्नाटक ने केरल से मादा हाथी के दान की औपचारिक मांग की।
- केरल के वन विभाग के पास 30 से अधिक कैद हाथी हैं, पर वह दान प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है।
- हाथी स्थानांतरण के लिए 2024 के नियमों में प्रमाणपत्र और जीनोमिक प्रोफ़ाइल अनिवार्य है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतहीसन को एक औपचारिक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने कोल्लूर के मूकांबिका मंदिर (उड़ुपी) में उपयोग के लिये केरल के किसी भी इच्छुक मंदिर से मादा हाथी के दान की विनती की। यह अनुरोध धार्मिक अनुष्ठानों और मंदिर की परम्परागत रस्मों में हाथी की भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु किया गया है।
पृष्ठभूमि और राज्य‑स्तरीय संदर्भ
केरल में वर्तमान में लगभग 30 कैद हाथी विभिन्न वन्यजीव अभयारण्यों जैसे कोट्टूर, धोनी, मलयटूर और कोन्नी में रखे गये हैं। राज्य में कुल 368 कैद हाथी हैं, जिनमें से हर साल 15‑20 हाथी प्राकृतिक कारणों से मरते हैं। इस संख्या के बावजूद, केरल सरकार ने पहले तेलंगाना के मुख्यमंत्री द्वारा माँगे गये कैंप हाथियों को प्रदान करने से इनकार कर दिया था, जिससे इस मुद्दे की संवेदनशीलता स्पष्ट होती है।
हाथी स्थानांतरण के कानूनी ढांचा
2024 में जारी कैद हाथी (स्थानांतरण या परिवहन) नियम के अनुसार, केवल उन हाथियों को ही एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरित किया जा सकता है, जिनके पास 24 फरवरी 2024 से पहले जारी स्वामित्व प्रमाणपत्र हो और उनका जीनोमिक प्रोफ़ाइल पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग सिस्टम में दर्ज हो। इसके अलावा, दानकर्ता राज्य के प्रमुख वन अधिकारी को यह प्रमाणित करना अनिवार्य है कि वर्तमान मालिक हाथी की देखभाल करने में असमर्थ है और नया मालिक उसे बेहतर देखभाल प्रदान कर सकेगा।
केरल वन विभाग की स्थिति
केरल के वरिष्ठ वन अधिकारी ने बताया कि विभाग का दान प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेना कानूनी रूप से संभव नहीं है, क्योंकि यह उनके आधिकारिक दायरे में नहीं आता। विभाग केवल नियम के अनुसार आवेदन की समीक्षा कर सकता है और उपयुक्त होने पर ही अनुमति दे सकता है। इस कारण से, कर्नाटक के अनुरोध को तुरंत पूरा करना विभाग के अधिकार के बाहर माना गया है।
संभावित प्रभाव और भविष्य की दिशा
यदि केरल इस दान को स्वीकृत करता है, तो यह दो राज्यों के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक सहयोग को और सुदृढ़ करेगा, साथ ही हाथी संरक्षण के मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चाओं को प्रेरित कर सकता है। दूसरी ओर, यह नियमों के कठोर पालन को भी उजागर करता है, जिससे भविष्य में समान अनुरोधों के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल स्थापित हो सकते हैं।