महाराष्ट्र सरकार ने 1 अगस्त से ऐप‑आधारित बाइक टैक्सी के लिए नई अनुमति प्रक्रिया शुरू की, जिससे पुणे के परिवहन यूनियनों ने विरोध का इशारा किया, जबकि यात्रियों ने किफायती और तेज़ विकल्प की सराहना की। नई नियमावली में राज्य डोमिसाइल प्रमाणपत्र और अन्य मानदंड अनिवार्य किए गए हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- 1 अगस्त से महाराष्ट्र में बाइक टैक्सी के लिए नई परमिट प्रणाली लागू होगी।
- पुणे के परिवहन यूनियन ने इस निर्णय के खिलाफ राज्यव्यापी विरोध का इशारा किया।
- यात्री किफायती, तेज़ और पर्यावरण‑मित्र विकल्प के रूप में इस सेवा का स्वागत कर रहे हैं, पर सुरक्षा पर सवाल उठे हैं।
राज्य परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने मंगलवार को विधानसभा में बताया कि बाइक टैक्सी चालकों को महाराष्ट्र डोमिसाइल प्रमाणपत्र के साथ-साथ अन्य नियमानुसार योग्यताएँ पूरी करनी होंगी, तभी उन्हें पंजीकृत एग्रीगेटर्स के माध्यम से सेवा प्रदान करने की अनुमति मिलेगी। यह घोषणा 7 जुलाई को की गई, जिससे 1 अगस्त से लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
पिछली स्थिति से उलटा मोड़
पहले मंत्री सरनाइक ने बाइक टैक्सी पर कड़ी कार्रवाई का वादा किया था, जिसमें वाहन जब्त करना और FIR दर्ज करना शामिल था। अब उन्होंने इस नीतिगत दिशा को बदलते हुए लाइसेंसिंग को मंजूरी दी, जिससे उद्योग में हलचल मची।
परिवहन यूनियनों का विरोध
पुणे की प्रमुख परिवहन संघों ने इस कदम को “वचनभंग” कहा। केशव क्षीरसर, महाराष्ट्र कामगार सभा के अध्यक्ष, ने कहा, “पहले मंत्री ने कड़ा रुख अपनाया था, अब वही शब्द बदलकर अनुमति दे रहे हैं।” इसी तरह, विद्यार्थी वाहन संघ के अध्यक्ष बापू भावे ने बताया कि ऑटो राइडलर अपने अलग ड्राइविंग बैज और पीले नंबर प्लेट वाले वाहन के साथ प्रतिस्पर्धा में पहले से ही दबाव में हैं, और निजी वाहन पर बाइक टैक्सी चलाने से उनका व्यवसाय और घटेगा।
यात्रीयों की आशा और सुरक्षा की चिंता
पुस्तक नगर की निवासी मधुरी नेटक ने कहा, “मेट्रो ने यात्रा समय घटाया है, पर कैब, ऑटो और बस की भीड़ अभी तक हल नहीं हुई। बाइक टैक्सी भीड़भाड़ वाले रास्तों में तेज़ चल सकती है और इलेक्ट्रिक मॉडल वायु प्रदूषण कम करने में मदद करेंगे।” वहीं, नारायण पेत के निवासी अक्षय किल्डर ने सुरक्षा को लेकर चेतावनी दी, “दिल्ली में कुछ बाइक राइडर्स की तेज़ी और आक्रामकता दुर्घटनाओं का कारण बनी है, और महिला यात्रियों को परेशान करने की घटनाएँ भी रही हैं। इसलिए कड़े नियमन आवश्यक है, विशेषकर बारिश जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों में।”
भविष्य की संभावनाएँ
यदि नियामक ढांचा उचित रूप से लागू होता है, तो बाइक टैक्सी पुणे के ट्रैफ़िक जाम को कम कर सकती है और पर्यावरणीय लाभ भी देगी। हालांकि, यूनियनों की संभावित विरोध कार्रवाई और सुरक्षा मानकों की प्रभावी निगरानी इस नई सेवा के व्यापक अपनाने को तय करेगी।