दिंडिगुल और मदुरै के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) में मोटर वाहन निरीक्षकों (एमवीआई) की भारी कमी से वाहन फिटनेस प्रमाणपत्र (एफसी) जारी होने में लंबी प्रतीक्षा हो रही है। यह प्रशासनिक खाई न केवल नागरिकों को परेशान कर रही है, बल्कि राजस्व हानि और सड़क सुरक्षा जोखिम भी बढ़ा रही है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- दिंडिगुल‑मदुरै के आरटीओ में एमवीआई पद खाली
- एफसी जारी करने में देरी, नागरिकों की असुविधा बढ़ी
- राजस्व हानि और सड़क सुरक्षा जोखिम गंभीर
दिंडिगुल के एक शेयर ऑटो चालक के अनुसार, उनका फिटनेस सर्टिफिकेट (FC) जल्द ही समाप्त होने वाला है, लेकिन आरटीओ में उपलब्ध अधिकारी कम होने के कारण उन्हें एक कार्यदिवस में सर्टिफिकेट मिलने की उम्मीद नहीं है। यह समस्या केवल दिंडिगुल तक सीमित नहीं है; मदुरै, मदुरै उत्तर, मध्य और दक्षिणी आरटीओ में भी समान स्थिति देखी जा रही है।
रिक्त पदों का प्रभाव
आरटीओ में ग्रेड‑1 और ग्रेड‑2 मोटर वाहन निरीक्षक (MVI) के पद खाली हैं, जिससे सप्ताह में केवल दो दिन, सोमवार और बुधवार, ही निरीक्षक कार्यालय में उपस्थित होते हैं। औसतन, दिंडिगुल आरटीओ में प्रतिदिन लगभग 70 वाहन पंजीकरण या फिटनेस प्रमाणपत्र के लिए आते हैं, लेकिन निरीक्षकों की अनुपस्थिति में प्रमुख जांच—जैसे ब्रेक, लाइट और टायर की जाँच—उन्हें अधूरी छोड़ देती है। सामाजिक कार्यकर्ता कन्नन ने चेताया है कि यह कमी सड़क सुरक्षा को गंभीर जोखिम में डाल सकती है।
राजस्व और प्रशासनिक बोझ
मदुरै विभाग के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, पिछले आठ वर्षों में पद खाली होने की प्रवृत्ति बढ़ी है, जिससे न केवल सेवा की गुणवत्ता घटती है, बल्कि राज्य को प्रतिदिन लगभग ₹10 लाख का राजस्व नुकसान भी हो रहा है। यह नुकसान मुख्यतः फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने और नियम प्रवर्तन में कमी के कारण हो रहा है। साथ ही, डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर और ज्वाइंट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर जैसे वरिष्ठ पदों में भी रिक्तियां मौजूद हैं, जिससे प्रशासनिक कार्यभार कई गुना बढ़ गया है।
स्वचालित परीक्षण ट्रैक की आलोचना
फरवरी 2026 में दिंडिगुल में शुरू किया गया स्वचालित परीक्षण ट्रैक भी समस्याओं से ग्रसित है। ड्राइविंग स्कूल निरीक्षक मानथन के अनुसार, 3.25 मीटर से अधिक व्हीलबेस वाले वाहनों को संकीर्ण लेन में चलाना कठिन हो रहा है, जबकि सेंसर अत्यधिक संवेदनशील होने के कारण छोटे‑छोटे त्रुटियों को भी गलती मान लिया जाता है। इससे कई अभ्यर्थियों को लाइसेंस प्राप्त करने में बाधा आती है।
भविष्य की संभावनाएं
यदि रिक्तियों को समय पर भरने के लिए विशेष उपाय नहीं किए गए, तो आरटीओ द्वारा प्रदान की जाने वाली सार्वजनिक सेवाएँ और भी गिरावट देख सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एक व्यापक भर्ती योजना, साथ ही मौजूदा स्वचालित ट्रैक के पुनःडिज़ाइन से इस संकट को कम किया जा सकता है। साथ ही, डिजिटल पोर्टल के माध्यम से वाहन पंजीकरण को डीलरशिप स्तर पर आगे बढ़ाना, नागरिकों के लिए प्रक्रिया को सरल बना सकता है।