तमिलनाडु ने 2019‑2020 से 2025‑2026 तक एंटीओडाया अन्न योजना के तहत निर्धारित चावल की मात्रा से पाँच साल में कमी दर्ज की है। केवल 2020‑21 में ही वितरण लगभग 98% तक पहुँचा, जबकि बाकी वर्षों में 73‑79% के बीच रहा। राज्य सरकार इस गिरावट को रोकने के लिए केंद्र से मौजूदा 35 किग्रा प्रति माह की पात्रता बनाए रखने की मांग कर रही है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • तमिलनाडु ने पाँच वर्षों में एएवाई के तहत निर्धारित चावल से कम निकाला।
  • COVID‑19 महामारी के वर्ष 2020‑21 में वितरण 98% तक पहुँचा।
  • केन्द्र की नई 7 किग्रा प्रति व्यक्ति योजना से राज्य की खाद्य सुरक्षा खतरे में।

तमिलनाडु में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के अंतर्गत एंटीओडाया अन्न योजना (AAY) के लिये निर्धारित चावल की मात्रा 2019‑20 से 2025‑26 तक लगातार कम रही है। राज्य ने सात‑साल की अवधि में पाँच बार आवंटित 6.99 लाख टन से कम निकाला, जबकि केवल दो साल में ही उपयोग 108% तक पहुँचा।

डेटा का विस्तृत विश्लेषण

COVID‑19 महामारी के चरम वर्ष 2020‑21 में, तमिलनाडु ने लगभग 6.99 लाख टन चावल निकाला, जिससे ऑफ‑टेक 98% तक पहुँचा। बाकी चार वर्षों में ऑफ‑टेक 73% (2022‑23, 2023‑24) से 79% (2024‑25) के बीच रहा। 2019‑20 और 2025‑26 में उपयोग आवंटन से अधिक रहा, परंतु यह दो अपवाद हैं, जबकि अधिकांश वर्षों में कमी स्पष्ट है।

प्रमुख सरकारी पहलें और विवाद

2020‑2023 के बीच केंद्र ने प्रधान मंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत अतिरिक्त मुफ्त अनाज प्रदान किया, जिससे तमिलनाडु को प्रति किलोग्राम ₹3 की दर पर चावल मिला। इस अवधि में राज्य को मुफ्त अनाज की अधिक मात्रा मिलने का आरोप लगा, जिससे केंद्र‑राज्य संबंधों में तनाव उत्पन्न हुआ। 1 जनवरी 2023 से दो कार्ड वर्गों (AAY व प्राथमिक गृहस्थ कार्ड) के लिये कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है, और 2024‑2029 तक मुफ्त अनाज की आपूर्ति जारी रखी गई है।

केन्द्र की नई संशोधन प्रस्ताव

केन्द्र ने प्रस्तावित किया है कि अब प्रत्येक व्यक्ति को 7 किग्रा प्रति माह, परन्तु कुल परिवार के लिये अधिकतम 35 किग्रा की सीमा होगी। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जॉसेफ विजय ने इस प्रस्ताव को ‘भोजन सुरक्षा को घटाने वाला’ बताया, क्योंकि इससे लगभग 70 लाख कमजोर वर्गों के लिये मासिक कोटा 65,261 टन से घटकर लगभग 42,040 टन रह जाएगा।

स्थानीय विशेषज्ञों की राय और संभावित दुरुपयोग

पूर्व नीति निर्माता टी. सदगोपन, जिन्होंने लंबे समय तक खाद्य वितरण पर काम किया है, का मानना है कि वर्तमान 35 किग्रा की पात्रता परिवार के आकार से स्वतंत्र होने के कारण दुरुपयोग की संभावना बढ़ा देती है। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य के औसत 3.5 सदस्यीय परिवार के लिये 30 किग्रा का स्थिर कोटा अधिक उचित होगा। वर्तमान में 18,64,600 AAY रेशन कार्ड जारी हैं, जिनमें 15.75 लाख कार्डधारकों का परिवार आकार 5 से कम है।

समय के साथ, इन अनावश्यक लाभार्थियों को हटाने की प्रक्रिया चल रही है, परन्तु व्यापक सुधार के बिना खाद्य सुरक्षा नीति का लक्ष्य अधूरा रह सकता है।