केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने बागलकोट में कहा कि कांग्रेस ने कर्नाटक में कैबिनेट विस्तार नहीं किया, जिससे शासन में अकार्यकुशलता और जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटक रहा है। उन्होंने राज्य में गंभीर सूखे और बिगड़ती कानून व्यवस्था की ओर इशारा किया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कांग्रेस ने कर्नाटक में कैबिनेट का विस्तार नहीं किया।
- राज्य में गंभीर सूखा और जल की कमी है।li>
- जोशी ने चुनावी रोल में राजनीतिक हस्तक्षेप की चेतावनी दी।
बागलकोट में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने कर्नाटक कांग्रेस की नीति की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि राज्य में सरकार पूरी तरह से गठित नहीं हुई है और कम मंत्रियों के कारण निर्णय‑निर्माण ठहराव में है।
कैबिनेट विस्तार में देरी का कारण
जोशी ने बताया कि कांग्रेस के नेता, विशेषकर राहुल गांधी, की अनुपस्थिति के कारण पार्टी ने आवश्यक मंत्रियों को नियुक्त नहीं किया है। इस देरी से न केवल प्रशासनिक कार्यों में बाधा आती है, बल्कि जनता के वास्तविक मुद्दों—जैसे जल संकट और कृषि‑आधारित समस्याओं—से ध्यान हट जाता है।
राज्य में सूखा और कानून व्यवस्था की स्थिति
कर्नाटक वर्तमान में गंभीर सूखा का सामना कर रहा है, जहाँ कई जिलों में पीने के पानी और पशु चारे की कमी है। जोशी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कोई भी राजनेता इन समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा, जबकि अपराध और सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ रही है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस राज्य को विनाश की ओर ले जा रही है।”
राष्ट्रीय सुरक्षा और चुनावी चेतावनी
जोशी ने गृह मंत्री प्रियंक खरगे को भी आलोचना की, यह कहते हुए कि वे आरएसएस और दंगे के बीच संबंधों को लेकर भटक रहे हैं। उन्होंने 2005‑2006 में केंद्र में नक्सल मुद्दे को कैसे सुलझाया गया, इसका उल्लेख किया और वर्तमान में नक्सल‑मुक्त भारत की उपलब्धि को दोहराया। साथ ही, उन्होंने चुनावी अधिकारी—तहसीलदार और उप‑तहसीलदार—को चेतावनी दी कि यदि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या बाहरी एजेंट की हस्तक्षेप हुई, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
भविष्य की संभावनाएँ
विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार की सार्वजनिक आलोचना कर्नाटक में राजनीतिक तनाव को बढ़ा सकती है। यदि कांग्रेस शीघ्र ही कैबिनेट का विस्तार नहीं करती, तो राज्य के विकास कार्य और जल‑संकट समाधान दोनों प्रभावित हो सकते हैं, जिससे जनता का भरोसा और भी घटेगा।