भाजपा ने राहुल और प्रियंका गांधी के वैयनाड में नहीं आने को ‘आंशिक राजनेता’ और ‘राजनीतिक पर्यटक’ कहकर तीखे शब्दों में आलोचना की है। वैयनाड गांधी परिवार के लिए चुनावी महत्त्व का केंद्र रहा है, जबकि राहुल तीन हफ्तों से सार्वजनिक रूप से अदृश्य हैं। कांग्रेस ने राहत कार्य को बाधित न करने के कारण इस अनुपस्थिति को उचित ठहराया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • बीजेपी ने गांधी भाई‑बहन को ‘आंशिक राजनेता’ कहा, जिससे वैयनाड में विवाद बढ़ा।
  • वैयनाड ने 2019 और 2024 में राहुल गांधी को दो बार सांसद बनाया, जिससे उनका इस क्षेत्र से विशेष संबंध है।
  • कांग्रेस ने राहत कार्य को बाधित न करने के कारण गांधी परिवार की अनुपस्थिति का बचाव किया।

बजट के बाद वैयनाड में 7 जुलाई को हुए विनाशकारी ढहाव के बाद भाजपा ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को ‘राजनीतिक पर्यटक’ कहकर तीखी आलोचना की। भाजपा के सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने 2019 में अमेठी में राहुल की हार को याद दिलाते हुए कहा कि वैयनाड ने उन्हें ‘राजनीतिक जमीन’ दी थी, पर अब दोनों ही इस जमीन से दूर हो गए हैं। यह बयान वैयनाड को भाजपा के राजनीतिक हथियार के रूप में पेश करता है।

वैयनाड का गांधी परिवार के लिए महत्त्व

वैयनाड ने 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को 12 लाख से अधिक मतों से जीत दिलाई, जब उन्होंने उत्तर प्रदेश के पारम्परिक कांग्रेस गढ़ अमेठी में हार का सामना किया था। 2024 में भी राहुल ने इस सीट से जीत हासिल की, पर बाद में रायबरेली से दोहरा जीत कर वैयनाड का सीट खाली कर दिया, जिससे प्रियंका ने नवंबर 2024 के बायपोल में 65% वोट शेयर के साथ जीत हासिल की। इस प्रकार वैयनाड ने गांधी परिवार को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी राजनीतिक जीवंतता बनाए रखने में मदद की है।

राहुल की अदृश्यता का राजनीतिक असर

राहुल गांधी ने 17 जून को कोटा में ‘छात्रों की गूँज’ कार्यक्रम लॉन्च किया, उसके बाद से वे लगभग तीन हफ्तों से सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे। भाजपा ने उनके विदेश यात्रा के रहस्य को उजागर करने की मांग की, जबकि कांग्रेस ने अभी तक इस पर कोई टिप्पणी नहीं की। इस अवधि के दौरान कांग्रेस पंजाब में फिशनलिज़्म और जुलाई 20 को शुरू होने वाले मानसून सत्र की तैयारी कर रही है, जिससे राहुल की अनुपस्थिति पार्टी के रणनीतिक नियोजन को प्रभावित कर सकती है।

कांग्रेस का बचाव

भाजपा के आरोपों पर कांग्रेस के मीडिया प्रमुख पवन खेरा ने कहा, “जब प्राकृतिक आपदा हो, तो VIP का दौरा नहीं होना चाहिए; यह केवल तब किया जाता है जब सरकार की कार्यवाही में खामियां हों।” उन्होंने कहा कि केरल सरकार ने राहत कार्य में सक्रियता दिखाई है और गांधी परिवार की अनुपस्थिति इस प्रक्रिया को बाधित नहीं करती। दोनों भाई‑बहन ने X (Twitter) पर अपने-संस्मरण में इस दुखद घटना को ‘गहरी पीड़ा’ बताया और शोक व्यक्त किया।

भविष्य की संभावनाएं

वैयनाड में इस विवाद ने भाजपा को नई राजनीतिक सामग्री प्रदान की है, जबकि कांग्रेस को अपने प्रमुख नेता की अनुपस्थिति को रणनीतिक रूप से उपयोग करना पड़ेगा। यदि राहुल अगले सप्ताह 17 जुलाई को निर्धारित कार्यक्रम में उपस्थित होते हैं, तो यह उनके राजनीतिक पुनरुत्थान का संकेत हो सकता है। अन्यथा, वैयनाड की ‘दो सांसदों की’ अवधारणा कांग्रेस के लिए एक नई चुनौती बनेगी।