ऑस्ट्रेलिया में आयोजित ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ कार्यक्रम के आयोजकों ने कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए पेड क्राउड के आरोपों को पूरी तरह अस्वीकार किया। उन्होंने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से सार्वजनिक रूप से माफी माँगने की मांग की।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- ऑस्ट्रेलिया में हुए मोदी कार्यक्रम में 30,000 दर्शक अपनी इच्छा से आए
- कांग्रेस के पेड क्राउड आरोपों को स्थानीय वॉलंटियर्स ने खारिज किया
- आयोजकों ने राहुल गांधी‑खरगे से सार्वजनिक माफी की मांग की
ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में 9 जुलाई को आयोजित ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ कार्यक्रम में लगभग 30,000 भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई उपस्थित हुए, जो स्वयं अपने खर्च पर आए थे। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बानीज और विक्टोरिया की प्रीमियर जैसिंटा एलन ने इस बड़े मंच को साझा किया।
पेड क्राउड के आरोपों का खंडन
कार्यक्रम के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस सभा को ‘पेड क्राउड’ यानी भाड़े की भीड़ का आयोजन बताया। इसके जवाब में आयोजकों ने एक खुला पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि उपस्थित लोग न तो किसी राजनीतिक दल के आह्वान पर और न ही किसी सरकारी एजेंसी के समर्थन से आए। सभी ने अपना खर्च स्वयं उठाया, जबकि कुछ ने स्थानीय समुदाय के समर्थन से यात्रा की व्यवस्था की।
स्थानीय स्वयंसेवकों की भूमिका
मेलबर्न, सिडनी, एडिलेड, पर्थ और ब्रिस्बेन सहित कई शहरों के स्वयंसेवकों ने ‘मोदी एयरवेज’ नामक चार्टर्ड फ्लाइट की व्यवस्था की। इस फ्लाइट के संचालन में महीनों की योजना, कागजी कार्यवाही और व्यक्तिगत समन्वय शामिल था, जिसमें कई स्वयंसेवकों ने अपना व्यवसाय और पारिवारिक समय त्याग दिया। उन्होंने कहा कि न तो भारत सरकार ने न ही किसी राजनीतिक पार्टी ने इस यात्रा के लिए कोई फंडिंग प्रदान की।
आवश्यकताएँ और संभावित प्रभाव
आयोजकों ने कांग्रेस से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं: (1) यह स्वीकार करना कि कोई भी फंडिंग पार्टी या सरकार से नहीं आई; (2) पेड क्राउड के आरोपों को वापस लेना; (3) भारतीय डायस्पोरा समुदाय के सभी सदस्यों से सार्वजनिक माफी माँगना। यदि इन मांगों को पूरा किया गया तो भारतीय प्रवासी समुदाय के भीतर राजनीतिक विभाजन को कम किया जा सकता है और विदेश में भारतीय पहचान की गरिमा बनी रहेगी।
भविष्य की दिशा
यह विवाद भारतीय विदेश नीति के ‘सांस्कृतिक कूटनीति’ पहल के प्रभाव को भी उजागर करता है। विदेश में आयोजित बड़े कार्यक्रमों में स्थानीय समुदाय की सहभागिता को राजनीतिक मुद्दों में बदलने से भारत की अंतर्राष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंच सकता है। इस कारण, भविष्य में ऐसी घटनाओं को अधिक पारदर्शी और गैर‑पार्टी‑संबंधित बनाना आवश्यक हो सकता है।