तेलंगाना ट्रांसपोर्ट विभाग ने पिछले वित्तीय वर्ष में 4,050 से अधिक वाहनों के पंजीकरण रद्द कर दिए, क्योंकि उन पर नाबालिगों को चलाते हुए पाया गया। यह कदम मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199A(4) के तहत लागू किया गया है, जिससे भविष्य में समान उल्लंघन रोकने की उम्मीद है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • 199A(4) धारा के तहत 4,070+ वाहनों का एक साल के लिए पंजीकरण रद्द किया गया।
  • नाबालिग को 25 वर्ष की आयु तक ड्राइविंग लाइसेंस नहीं मिलेगा।
  • भविष्य में नाबालिग द्वारा वाहन चलाने पर कड़ी निगरानी और दंड सुनिश्चित किया जाएगा।

तेलंगाना ट्रांसपोर्ट विभाग ने 13 जुलाई, 2026 को एक विशेष कार्रवाई के तहत एक वर्ष के लिए एक वाहन का पंजीकरण रद्द कर दिया, क्योंकि वह वाहन पुलिस सब‑इंस्पेक्टर पुजारी तिरुपति की छह साल की पोती द्वारा चलाया जा रहा था। यह घटना नर्सिंगी के गंधमगुडा‑बैरागिगुडा रोड पर हुई, जहाँ तेज़ी से चलाते समय पोती को कई गवाहों ने देखा।

धारा 199A(4) का कानूनी पहलू

ट्रांसपोर्ट विभाग ने इस कार्रवाई को मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 199A(4) के तहत लागू किया। इस धारा के अनुसार, यदि कोई नाबालिग (18 वर्ष से कम) वाहन चलाता है तो वाहन के मालिक या अभिभावक को दंडनीय ठहराया जाता है। साथ ही, नाबालिग को 25 वर्ष की आयु तक कोई भी लर्नर या ड्राइविंग लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा।

पिछले वित्तीय वर्ष में व्यापक कार्रवाई

विभाग ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में कुल 4,070 वाहनों के पंजीकरण रद्द किए गए। यह आंकड़ा नाबालिगों द्वारा गाड़ी चलाने की समस्या को गंभीरता से ले रहा है, विशेषकर स्कूलों और शहरी क्षेत्रों में ट्रैफ़िक सुरक्षा को लेकर उठे कई प्रश्नों के बाद। इस कार्रवाई को विभाग ने “सख्त प्रवर्तन” का उदाहरण बताया।

परिचालन निर्देश और भविष्य की योजना

अक्टूबर 2024 में जारी एक आधिकारिक परिपत्र में बताया गया था कि 199A धारा के तहत वाहन पंजीकरण प्रमाणपत्र को जब्त किया जाएगा, नाबालिग के विवरण को पंजीकरण प्राधिकरण को भेजा जाएगा, और उचित प्रक्रिया के बाद पंजीकरण को 12 महीने के लिए रद्द किया जाएगा। इस डेटाबेस में नाबालिग के विवरण को दर्ज किया जाता है, जिससे 25 वर्ष की आयु से पहले उन्हें कोई भी लाइसेंस नहीं दिया जा सकेगा।

सड़क सुरक्षा पर व्यापक प्रभाव

नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने की घटनाओं में निरंतर वृद्धि ने राज्य के सड़क सुरक्षा नीतियों पर पुनर्विचार को मजबूर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी कड़ी कार्रवाई से न केवल अवैध ड्राइविंग कम होगी, बल्कि दुर्घटनाओं में भी गिरावट आएगी, जैसा कि पिछले साल के आंकड़े दर्शाते हैं जहाँ 128 दुर्घटनाएँ नाबालिगों की भागीदारी से हुई थीं।