अध्यक्ष नड्डू ने पोलावाराम जलीय परियोजना के 89% कार्य पूर्ण होने की घोषणा की और बताया कि सर आर्थर कॉटन बैरेज के 117 नए गेटों की प्रतिस्थापन कार्य 2027 के गोडावरी पुष्करां से पहले पूरा हो जाएगा।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- पोलावाराम परियोजना के 89% निर्माण कार्य समाप्त
- सिर आर्थर कॉटन बैरेज के 117 गेटों का नवीनीकरण 2027 से पहले
- गोडावरी पुष्करां‑2027 के लिए जल‑संकट समाधान एवं पर्यटन विकास की योजना
अध्यक्ष न. चंद्रबाबू नड्डू ने 13 जुलाई, 2026 को पूर्वी गोदावरी जिले के दोवलेश्वरम् में भू‑मि पूजा कर 117 नए गेटों की स्थापना का औपचारिक शुभारंभ किया। यह कार्य सर आर्थर कॉटन बैरेज (SACB) के मौजूदा गेटों को बदलने और पुरानी विद्युत उपकरणों को अद्यतन करने के लिये है, जिसकी लागत लगभग ₹152.95 करोड़ निर्धारित की गई है।
पोलावाराम परियोजना का वर्तमान स्थिति
नड्डू ने कहा कि पोलावाराम जल सिंचन परियोजना के कुल निर्माण कार्यों में से 89% काम पूरा हो चुका है। यह परियोजना गोदावरी नदी के जल को पूर्व, मध्य और पश्चिमी डेल्टाओं में विभाजित कर 10.30 लाख एकड़ कृषि भूमि को सिंचित करती है, जिससे राज्य की खाद्य सुरक्षा और किसान आय में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।
गोडावरी पुष्करां‑2027 और बैरेज नवीनीकरण का महत्व
गोडावरी पुष्करां हर 12 वर्ष में एक बार आयोजित धार्मिक महोत्सव है, जिसमें लाखों श्रद्धालु नदी में स्नान करते हैं। नड्डू ने बताया कि SACB का नवीनीकरण इस बड़े उत्सव से पहले पूरा हो जाएगा, जिससे जल प्रवाह नियंत्रित रहेगा और बाढ़‑प्रबंधन में मदद मिलेगी। साथ ही, इस अवसर पर शहरी निकायों में ₹1,200 करोड़ के पूँजी निवेश की योजना है, जिससे राजामहेंद्रवर्म और निडावोलु जैसे नगर पालिकाओं में बुनियादी ढाँचा सुधरेगा।
डेल्टा आधुनिकीकरण और पर्यटन पहल
जल संसाधन विभाग ने गोदावरी डेल्टा के आधुनिकीकरण के लिये तीन‑वर्षीय योजना तैयार की है, जिसमें द्वीपों के क्षरण को रोकने के लिये जटिल भू‑वैज्ञानिक सर्वेक्षण शामिल है। इसके अतिरिक्त, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री कंदुला दुर्गेश के प्रस्ताव पर दोवलेश्वरम् के पास स्थित 65 एकड़ की पिचुका लंका और 200 एकड़ की बब्बरलंका को पर्यटन स्थल बनाकर स्थानीय रोजगार सृजन करने की योजना है।
राजनीतिक संदर्भ और भविष्य की दिशा
नड्डू ने यह भी कहा कि अगर 2019 में उनके दल (TDP) को सत्ता मिली होती तो पोलावाराम परियोजना 2021 तक पूर्ण हो जाती। उन्होंने विरोधी YSR कांग्रेस पर जल‑स्रोतों के दुरुपयोग के आरोप भी लगाए। अंत में उन्होंने उपमुख्यमंत्री के. पवन कल्याण के साथ मिलकर “स्वर्ण अंध्र प्रदेश” बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई, जो प्रधानमंत्री मोदी के “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य के साथ संरेखित है।
इन सभी पहलों से न केवल कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि जल‑सुरक्षा, पर्यटन और क्षेत्रीय विकास के लिये भी नई संभावनाएँ खुलेंगी।