पश्चिम बंगाल के तीन पूर्व तृणमूल कांग्रेस राजसभा सांसद, सुश्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चीक बराइक, भाजपा के उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन जमा कर चुके हैं। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और भाजपा राज्य अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने इस प्रक्रिया में भाग लिया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सुश्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चीक बराइक ने भाजपा के राजसभा उम्मीदवार के रूप में नामांकन फाइल किया।
  • मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और भाजपा राज्य अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने उम्मीदवारों को समर्थन दिया।
  • तीन बायपोल्स के लिए चुनाव 24 जुलाई को निर्धारित हैं, जिससे पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई गतिशीलता आएगी।

पश्चिम बंगाल की राजनैतिक धारा में एक और मोड़ आया है, जब तीन पूर्व तृणमूल कांग्रेस राजसभा सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर अपने नामांकन फाइल किए। यह घटना 13 जुलाई, 2026 को कोलकाता में हुई, जहाँ मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और भाजपा राज्य अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने इस प्रक्रिया में उपस्थित होकर समर्थन दिया।

पृष्ठभूमि और कारण

तृणमूल कांग्रेस ने 2026 के विधानसभा चुनाव में भारी हार झेली और कई वरिष्ठ नेता अपनी सीटें खो बैठे। इस परिप्रेक्ष्य में, सुश्मिता देव (तीन बार राजसभा सदस्य), सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चीक बराइक ने 9 जुलाई को भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया। उनका यह कदम केवल व्यक्तिगत राजनीतिक पुनर्स्थापन नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर वैचारिक बदलाव और शक्ति संतुलन को दर्शाता है।

नामांकन प्रक्रिया और पार्टी का संदेश

उम्मीदवारों ने कल सुबह कोल्काता स्थित पश्चिम बंगाल विधानसभा भवन में रिटर्निंग ऑफिसर के सामने अपने दस्तावेज़ जमा किए। इस दौरान सुश्मिता देव ने कहा, “सीएम के साथ बैठक में ऐसा लगा जैसे हम एक ही परिवार हैं। भाजपा में शामिल होकर फिर से राजसभा के लिए नामांकन करना मेरे लिए सम्मान की बात है।” भाजपा ने इस अवसर को “तृणमूल का अंत, नई दिशा की शुरुआत” के रूप में प्रस्तुत किया, जहाँ भट्टाचार्य ने कहा कि “तृणमूल अब जड़हीन हो गया है, लोग उसके बारे में सुनना नहीं चाहते”।

भविष्य की संभावनाएँ

राजसभा के तीन बायपोल्स 24 जुलाई को निर्धारित हैं। भाजपा के पास पश्चिम बंगाल विधानसभा में 208 में से 294 सीटें हैं, जबकि तृणमूल के भीतर दो गुटों में बंटाव है। यह असंतुलन भाजपा को एलीट स्तर पर मजबूत करने और राज्य में अपनी पकड़ बढ़ाने का अवसर प्रदान कर सकता है। साथ ही, इस परिवर्तन से राष्ट्रीय स्तर पर भी केंद्र-राज्य संबंधों में नई गतिशीलता उत्पन्न हो सकती है।

विशेष टिप्पणी

पूर्व कांग्रेस नेता सुश्मिता देव का असम से राजसभा तक का सफर, तृणमूल में उनके 2021 के प्रवेश और अब भाजपा में परिवर्तन, भारतीय राजनीति में निरंतर बदलाव की गहरी कहानी को उजागर करता है। यह घटना दर्शाती है कि व्यक्तिगत आकांक्षा, पार्टी की आंतरिक अस्थिरता और राष्ट्रीय राजनीति के बड़े खेल में कैसे आपस में जुड़ते हैं।