कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने मायसूर में बिना सूचना के किए जा रहे विक्रेताओं के जबरन हटाने को गैरकानूनी बताया और 2014 के स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट के पूर्ण कार्यान्वयन की मांग की। उनके अनुसार यह कदम शहर की अर्थव्यवस्था और गरीब वर्ग को गंभीर नुकसान पहुँचाएगा।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- मायसूर में सड़क विक्रेताओं के खिलाफ जबरन निष्कासन पर CPI(M) ने रोक का आह्वान किया।
- स्ट्रीट वेंडर्स (प्रोटेक्शन ऑफ लिवलीहुड एंड रेगुलेशन ऑफ स्ट्रीट वेंडिंग) एक्ट, 2014 के अनुपालन की मांग की गई।
- विक्रेताओं को वैध स्थल, लाइसेंस और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की जरूरत पर ज़ोर दिया गया।
मायसूर, 14 जुलाई 2026 – कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के मायसूर जिला कमेटी ने शहर में बिना पूर्व सूचना और वैकल्पिक व्यवस्था के सड़क विक्रेताओं को जबरन हटाने की निंदा की। जिला सचिव जगदीश सूर्य ने कहा कि ये विक्रेता शहर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनका निष्कासन सीधे तौर पर हजारों गरीब परिवारों को संकट में धकेल देगा।
पृष्ठभूमि और कानूनी ढांचा
2014 में पारित स्ट्रीट वेंडर्स (प्रोटेक्शन ऑफ लिवलीहुड एंड रेगुलेशन ऑफ स्ट्रीट वेंडिंग) एक्ट के तहत राज्य और स्थानीय निकायों को विक्रेताओं के अधिकारों की रक्षा करने का दायित्व है। इस अधिनियम में कहा गया है कि किसी भी निष्कासन अभियान से पहले विस्तृत सर्वेक्षण, योग्य विक्रेताओं को वेंडिंग प्रमाणपत्र जारी करना, टाउन वेंडिंग कमिटी का प्रभावी संचालन और नियत वेंडिंग ज़ोन की पहचान अनिवार्य है।
वर्तमान स्थिति और सीपीआई(एम) की मांग
जगदीश सूर्य ने कहा कि मायसूर नगर निगम (MCC) और जिला प्रशासन ने इन प्रक्रियाओं को नजरअंदाज किया है। उन्होंने तुरंत निष्कासन को रोकने, विक्रेताओं के साथ परामर्श करने, वैध वेंडिंग ज़ोन निर्धारित करने और 2014 के अधिनियम को “अक्षर और भावना” दोनों में लागू करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि शहरी विकास के नाम पर गरीबों के जीवनयापन के अधिकारों को छीनना सामाजिक न्याय के विरुद्ध है।
शहरी विकास और सामाजिक समावेशन का संतुलन
शहरों में स्वच्छता, व्यवस्था और सौंदर्य को बढ़ावा देना आवश्यक है, परन्तु यह लक्ष्य तभी साध्य हो सकता है जब विक्रेताओं को उनके वैध स्थानों पर काम करने की अनुमति दी जाए। कई भारतीय शहरों में सफल मॉडल मौजूद हैं जहाँ विक्रेताओं को नियोजित बाजारों में स्थान देकर दोनों पक्षों के हितों को संतुलित किया गया है।
आगे का रास्ता
सीपीआई(एम) ने राज्य सरकार, MCC, जिला प्रशासन, निर्वाचित प्रतिनिधियों, नागरिक समाज संगठनों और जनता से अपील की है कि वे मिलकर इस मुद्दे का समाधान निकालें। यदि उचित उपाय नहीं किए गए तो यह मुद्दा सामाजिक असंतोष और संभावित विरोध प्रदर्शनों का कारण बन सकता है, जो शहरी शांति को बाधित कर सकता है।