सोनम वांगचुक ने जे.ए.एन.टी. में 16वें दिन अपना भूख हड़ताल जारी रखी और नेशनल एलिट टेस्ट (NEET) में प्रश्नपत्र लीक के जवाब में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग की। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि लोकतंत्र को संवेदनशीलता चाहिए, कठोरता नहीं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सोनम वांगचुक 16वें दिन जंतर मंटर में भूख हड़ताल जारी रखे
  • उन्होंने उत्तरदायित्व और व्यापक शैक्षणिक सुधार की माँग की
  • प्रधानमंत्री मोदी को संवेदनशील, न कि कठोर, रहने की अपील की

नई दिल्ली: जलवायु कार्यकर्ता और युवा शैक्षणिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 16वें दिन जंतर मंटर में अपना अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रखा, जो कोकरॉच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित NEET‑UG प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ विरोध का हिस्सा है। उन्होंने भारतीय एक्सप्रेस हिंदी को बताया कि केवल एक मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि सम्पूर्ण परीक्षा प्रणाली की गहरी सुधार की आवश्यकता है।

NEET लीक की पृष्ठभूमि

2026 में नेशनल एलिट टेस्ट (NEET) में प्रश्नपत्र लीक की खबर ने देश भर में छात्र, अभिभावक और शैक्षणिक संस्थानों में गहरी असंतुष्टि उत्पन्न की। लीक के पीछे कई बार के आरोपित भ्रष्टाचार और अनियमितता ने यह सवाल उठाया कि क्या मौजूदा परीक्षा मॉडल भारत की सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं को सही ढंग से दर्शाता है। इस घटना ने कई युवा कार्यकर्ताओं को एकजुट किया, जिनमें CJP और सोनम वांगचुक प्रमुख हैं।

वांगचुक की माँगें और CJP का प्रदर्शन

वांगचुक ने स्पष्ट रूप से कहा कि उत्तरदायित्व का प्रारम्भिक कदम इस्तीफा है, परन्तु इससे आगे की दिशा तय करनी होगी। उन्होंने कहा, “यह मुद्दा मौसमी सत्र में संसद में बहस का विषय बनना चाहिए।” उन्होंने सभी राजनीतिक दलों को इस आंदोलन में शामिल होने का आग्रह किया, यह दर्शाते हुए कि यह मंच किसी भी राजनीतिक रंग से मुक्त है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और संभावित परिदृश्य

वर्तमान में केंद्र सरकार ने वांगचुक से कोई संपर्क नहीं किया है, जिससे उनका तर्क सिद्ध होता है कि जनता को आवाज़ उठानी पड़ेगी। यदि बड़े दलों के नेता—जैसे राहुल गांधी या अखिलेश यादव—इस मंच पर नहीं आते, तो यह उनके संकीर्ण दृष्टिकोण की ओर संकेत करेगा, जैसा वांगचुक ने चेतावनी दी। इस प्रकार, आंदोलन का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या संसद में वास्तविक सुधार के प्रस्ताव रखे जाएंगे।

शिक्षा प्रणाली पर दीर्घकालिक प्रभाव

वांगचुक ने बताया कि यदि परीक्षा पत्र लीक हो कर डॉक्टर बना, तो उन डॉक्टरों की गुणवत्ता पर सवाल उठेगा, जिससे रोगियों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इसी प्रकार, धोखे से पास हुए इंजीनियरों द्वारा निर्मित इमारतें ढह सकती हैं। यह केवल शिक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि सम्पूर्ण भारतीय समाज की अखंडता को चुनौती देता है। अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से कहा, “एक लोकतंत्र को सहानुभूति और करुणा से चलना चाहिए, कठोरता से नहीं।”