ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन ने मदुराई डिवीजन में भारी स्टाफ की कमी के कारण 48 घंटे लगातार काम करने के विरोध में प्रदर्शन किया। एसोसिएशन ने ओवरटाइम, कम ड्यूटी घंटे और रात की ड्यूटी भत्ते की माँग की।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- मदुराई में 572 स्टेशन मास्टर पदों में से 70 खाली हैं
- स्टाफ की कमी के कारण 48‑घंटे लगातार ड्यूटी लागू हो रही है
- एसोसिएशन ने 8‑घंटे ड्यूटी, ओवरटाइम व रात की ड्यूटी भत्ता माँगा
ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स' एसोसिएशन (AISMA) के सदस्य मंगलवार को मदुराई में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन कर रहे हैं, क्योंकि रेलवे प्रशासन ने उन्हें अत्यधिक और लगातार 48‑घंटे की ड्यूटी देने का आदेश दिया है। यह मांग तब उत्पन्न हुई जब विभाग में कुल 572 स्टेशन मास्टर पदों में से 70 पद खाली रह गए हैं, जिससे बुनियादी संचालन पर भारी दबाव पड़ रहा है।
पृष्ठभूमि
मदुराई रेलवे जंक्शन एक प्रमुख ट्रांसपोर्ट हब है, जहाँ निरंतर ट्रेन चलन और शंटिंग कार्य होते हैं। भारतीय रेल ने इस जंक्शन के काम को "इंटेंसिव" वर्गीकृत किया है और आधिकारिक तौर पर केवल 36 घंटे की ड्यूटी निर्धारित की थी। हालांकि, स्टाफ की कमी के कारण कई स्टेशन मास्टरों को लगातार 48 घंटे तक काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जो सुरक्षा मानकों के खिलाफ है।
संघ की माँगें
संघ ने प्रशासन को एक विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने खाली पदों की संख्या, कार्यभार और सुरक्षा जोखिमों का उल्लेख किया। प्रमुख माँगें हैं:
- अस्थायी रूप से 12‑घंटे ड्यूटी को हटाकर सभी स्टेशन मास्टरों को केवल 8‑घंटे की ड्यूटी देना
- अतिरिक्त काम के लिए ओवरटाइम भत्ता प्रदान करना
- रात की ड्यूटी के लिए विशेष भत्ता देना
- भर्ती प्रक्रिया को तेज़ करने के लिए कम से कम आठ महीने की अवधि में सभी खाली पद भरना
सुरक्षा एवं दक्षता पर असर
वर्तमान में, लगातार दो दिन की ड्यूटी के कारण थकान बढ़ रही है, जिससे न केवल कर्मचारियों की सेहत पर असर पड़ता है, बल्कि ट्रेन संचालन की सुरक्षा और दक्षता भी खतरे में पड़ती है। विशेषज्ञों का मानना है कि थकान के कारण मानव त्रुटि की संभावना बढ़ती है, जो रेलवे दुर्घटनाओं की मूल वजहों में से एक है।
भविष्य की दिशा
यदि प्रशासन इन माँगों को नजरअंदाज करता है, तो आगे भी बड़े पैमाने पर हड़ताल और सार्वजनिक असंतोष की संभावना है। दूसरी ओर, यदि शीघ्र ही भर्ती प्रक्रिया को तेज़ किया जाए और उचित भत्ते लागू किए जाएँ, तो श्रमिकों का मनोबल बढ़ेगा और रेल नेटवर्क की विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी।