मुख्यमंत्री अ. रेवनथ रेड्डी ने केंद्र सरकार से मम्नूर और आदिलाबाद हवाई अड्डों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की अपील की। साथ ही उन्होंने वीज़ा-सम्बंधित विकास, सिप्लेन सेवाओं और राजनीति‑विकास के अलगाव पर जोर दिया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • मम्नूर‑आदिलाबाद हवाई अड्डों को अंतरराष्ट्रीय मानकों तक अपग्रेड करने की माँग।
  • विजयवाड़ा‑हुसैनसागर के बीच सिप्लेन सेवा की संभावना पर चर्चा।
  • राजनीति को विकास से अलग रखने की मुख्यमंत्री की स्पष्ट राय।

मुख्यमंत्री अ. रेवनथ रेड्डी ने नई दिल्ली में केंद्रीय सिविल एयवेशन मंत्री किनजारापु राम मोहन नायडू से मुलाकात करते हुए तेलंगाना के दो प्रमुख हवाई अड्डों – मम्नूर (वारंगल) और आदिलाबाद – को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की अपील की। यह मांग राज्य के आर्थिक विकास को तेज़ करने, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ाने के व्यापक रणनीतिक योजना का हिस्सा है।

हवाई अड्डों के रणनीतिक महत्व

वारंगल स्थित मम्नूर हवाई अड्डा, रेलवे कोच फैक्ट्री, मेगा टेक्सटाइल पार्क और कई औद्योगिक केंद्रों की निकटता से जुड़ा हुआ है, जिससे यह उत्तर तेलंगाना और खम्माम के लिए एक प्रमुख लॉजिस्टिक हब बन सकता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि भूमि अधिग्रहण पहले ही पूरा हो चुका है और अब केंद्र को MRO (रखरखाव‑मरम्मत‑ओवरहॉल) सुविधाओं, एयरो कार्गो इन्फ्रास्ट्रक्चर और काकतीयन वास्तु‑शैली के डिजाइन पर ध्यान देने की जरूरत है। लक्ष्य 2 जून 2028 तक हवाई अड्डा तैयार करना है।

आदिलाबाद में सिविल‑डिफेंस सहयोग

आदिलाबाद में योजना बन रहा नया हवाई अड्डा दोहरा उपयोग—सिविल और रक्षा—का है। मुख्यमंत्री ने मंत्री को आग्रह किया कि दोनों परियोजनाओं को एक साथ समन्वित किया जाए, जिससे प्रशिक्षण सुविधाओं, फ्लाइट स्कूलों और संभावित रक्षा‑सिविल सहयोग को बढ़ावा मिले। यह क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास दोनों को सुदृढ़ करेगा।

सेप्लेन सेवा का प्रस्ताव

विजयवाड़ा के प्राकाशम् बैरेज और हैसैनसागर के बीच सेप्लेन सेवा शुरू करने की संभावना पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी जलमार्गीय कनेक्टिविटी पर्यटन को बढ़ावा देगी और जलसेवा के माध्यम से व्यापारिक अवसरों को सुदृढ़ करेगी। केंद्रीय मंत्री ने प्रस्तावों को आधिकारिक रूप से जमा करने की मांग की।

राजनीति और विकास का स्पष्ट विभाजन

बैठक के दौरान, रेवनथ रेड्डी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विकास के मुद्दों को राजनीति के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीति का कार्य केवल चुनाव के समय तक सीमित होना चाहिए, जबकि सतत विकास के लिए निरंतर संवाद और सहयोग आवश्यक है। इस दृष्टिकोण ने राज्य‑केन्द्र संबंधों में पारदर्शिता और तेज़ी की आशा जताई।