87 वर्षीय रामचंद्र गोव्डा, जिन्होंने 1970 के दशक में जनसंघ से राजनीति की शुरुआत की, का बेंगलुरु के निजी अस्पताल में निधन हो गया। पाँच दशकों तक कर्नाटक विधान परिषद के सदस्य और कई बार मंत्री रह चुके इस नेता ने भाजपा के निर्माण में अहम भूमिका निभाई।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • रामचंद्र गोव्डा का निधन, भाजपा के प्रथम पीढ़ी के नेता का अंत
  • जनसंघ से शुरू हुआ सफ़र, RSS के विचारधारा से प्रभावित
  • कर्नाटक में पार्टी के संगठनात्मक आधार को मजबूत करने में उनका योगदान

रामचंद्र गोव्डा, 87 वर्ष आयु, बेंगलुरु के निजी अस्पताल में आयु-संबंधी बीमारी के कारण गुजर गए। कर्नाटक के राजनीतिक परिदृश्य में उनका नाम दशकों से गूँजता आया है, जहाँ उन्होंने जनसंघ से शुरू होकर भाजपा के प्रमुख नेता बनने तक का मार्ग तय किया।

प्रारम्भिक जीवन और जनसंघ में प्रवेश

1938 में कुनीगल, तु्मकुरु जिले में जन्मे गोव्डा बचपन से ही राष्ट्रीय विचारधारा से जुड़े रहे। हाई स्कूल के दौरान उन्होंने गोवा मुक्ति आंदोलन में भाग लिया और राष्ट्रीय स्वयंत्त संघ (RSS) के सक्रिय सदस्य बन गए। 1968 में उडुपी नगरपालिका चुनाव में वी.एस. आचार्य की जीत के बाद, 1970 में उन्होंने बेंगलुरु सिटी कॉरपोरेशन में काउंसिलर के रूप में पहला चुनावी विजय हासिल की, जो दक्षिण भारत में जनसंघ की पहली जीत थी।

राजनीतिक उन्नति और विधान परिषद में पाँच बार निर्वाचित

गोह्डा ने बेंगलुरु विकास प्राधिकरण (BDA) और सिटी इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट बोर्ड (CITB) में महत्वपूर्ण पद संभाले। 1988 में उन्होंने बेंगलुरु ग्रेजुएट्स सीट से कर्नाटक विधान परिषद के सदस्य के रूप में प्रवेश किया और 2018 तक लगातार पाँच बार इस पद पर रहे। इस अवधि में उन्होंने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने, नई पीढ़ी को तैयार करने और स्थानीय मुद्दों पर प्रभावी समाधान प्रदान करने में प्रमुख भूमिका निभाई।

मंत्री पद और प्रशासनिक योगदान

2006 में भाजपा-जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन के तहत, गोव्डा को सिल्क, योजना‑आंकड़े, लघु बचत‑लॉटरी तथा विज्ञान‑प्रौद्योगिकी विभागों का जिम्मा सौंपा गया। 2008 में भाजपा ने अकेले सत्ता संभाली, तब उन्हें मेडिकल एजुकेशन विभाग का मंत्रित्व मिला। 2010 में उन्हें मंत्रालय से हटाकर कर्नाटक राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया, जहाँ उन्होंने दीर्घकालिक विकास रणनीतियों को आकार देने में योगदान दिया। 2018 के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया, परन्तु पार्टी के वरिष्ठ सलाहकार के रूप में उनका प्रभाव बना रहा।

विरासत और भविष्य की दिशा

बेंगलुरु के पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदीयुरप्पा ने गोव्डा के निधन पर “एक और भाई खो दिया” कहा, और पार्टी निर्माण में उनके कठिन परिश्रम को याद किया। उनकी मृत्यु कर्नाटक में भाजपा की प्रथम पीढ़ी के नेताओं के अंत का प्रतीक है, जिससे नई पीढ़ी को उनके अनुभव से सीख लेकर आगे बढ़ना होगा।