कोन्यक यूनियन ने असम और नागालैंड के बीच लंबित सीमा विवाद को सुलझाए बिना द्विपक्षीय तेल अन्वेषण समझौते को लागू करने से इनकार कर दिया है। यह मांग भूमि‑स्वामियों की सहमति, स्पष्ट सीमा रेखा और सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था पर आधारित है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • असम-नागालैंड सीमा विवाद अभी भी असंतुलित है
  • कोन्यक यूनियन ने तेल अन्वेषण पर रोक लगाने की मांग की
  • भूमि मालिकों की सहमति और सीमा सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए

कोन्यक यूनियन, जो कोन्यक नागा समुदाय का सर्वोच्च प्रतिनिधि निकाय है, ने नागालैंड सरकार को स्पष्ट संकेत दिया है कि असम के साथ हस्ताक्षरित तेल अन्वेषण समझौते को तभी लागू किया जाए जब दोनों राज्यों के बीच लंबित सीमा विवाद समाप्त हो जाएँ। यह बयान 14 जुलाई को जारी किए गए एक आधिकारिक बयान में दिया गया, जिसमें टिज़िट‑नागिनीमोरा बेल्ट और लोंगवा‑पोंगचाओ सीमा क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई।

पृष्ठभूमि और इतिहास

असम‑नागालैंड सीमा विवाद 1960 के दशक से चल रहा है, जब नागालैंड को असम से अलग किया गया। तब से लेकर अब तक इस सीमा पर 150 से अधिक लोगों की जान गई है, और कई बार स्थानीय जनजातियों और राज्य एजेंसियों के बीच टकराव हुए हैं। इस तनाव ने आर्थिक विकास के अवसरों, विशेषकर तेल एवं गैस अन्वेषण के संभावित क्षेत्रों को भी अटकाया है।

समझौते की शर्तें और कोन्यक यूनियन की शर्तें

जून 11 को नई दिल्ली में असम और नागालैंड सरकारों ने तेल अन्वेषण पर एक समझौता (MOU) पर हस्ताक्षर किए, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति थी। कोन्यक यूनियन ने इस समझौते की पुनरावलोकन करने के बाद कहा कि बिना स्पष्ट सीमा रेखा, भूमि‑स्वामियों की सहमति और सुदृढ़ सीमा सुरक्षा के, इस परियोजना को आगे बढ़ाना “अवैध” होगा। उन्होंने विशेष रूप से टिज़िट‑नागिनीमोरा बेल्ट, मोन जिले के लोंगवा और अरुणाचल प्रदेश के लोंगडिंग जिले के पोंगचाओ के बीच की सीमा को विवादित बताया।

भविष्य की संभावनाएँ और सरकार पर अपेक्षाएँ

कोन्यक यूनियन ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह 12 जुलाई 2025 को जारी किए गए स्मरणपत्र को गंभीरता से ले और सीमा सुरक्षा, क्रॉस‑बॉर्डर प्रवास रोकथाम और स्थानीय जनजातियों के अधिकारों को संरक्षित करने के लिए त्वरित कदम उठाए। यदि राज्य और केंद्र सरकार इस अनुरोध को मानते हैं, तो तेल अन्वेषण जैसे बड़े निवेश परियोजनाओं को सामाजिक असंतोष से बचाया जा सकता है और एक स्थायी विकास मॉडल स्थापित हो सकता है।