बैंडि संजय के पुत्र भगीरथ को टेलंगाना हाई कोर्ट ने 1 लाख रुपये के बांड और दो गारंटरों के साथ जमानत दी। यह निर्णय 17 वर्षीय लड़की की माँ द्वारा दर्ज पीओसीएसओ शिकायत के बाद आया, जिसमें बाल यौन शोषण के आरोप हैं।
टेलंगाना हाई कोर्ट ने गुरुवार को बैंडि संजय कुमार के पुत्र भगीरथ को पीओसीएसओ (Protection of Children from Sexual Offences) और भारतीय न्याय संहिता के तहत आरोपों के बाद जमानत दी। अदालत ने 1 लाख रुपये का बांड और दो गारंटरों की मांग की, जिससे आरोपी को न्यायिक हिरासत से बाहर आने की अनुमति मिली।
मामले की पृष्ठभूमि
मामला 8 मई को पेतबशीराबाद पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया, जब 17 वर्षीया लड़की की माँ ने शिकायत की कि उसके बेटे ने उसे धोखे से शादी के वादे के साथ लुभाया, शराब पीने के लिए मजबूर किया और बार-बार यौन शोषण किया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने 5(1) और 6 खंड के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता के 64(2)(m) खंड को जोड़ते हुए आरोप बढ़ा दिए।
जाँच और गिरफ्तारी
भगीरथ को प्रारम्भ में पुलिस से हिरासत में लिया गया, पर बाद में वह गायब हो गया। 16 मई को पुलिस को उसके आंदोलन का पता चला और उसे नर्सिंगी पुलिस स्टेशन के पास टेक पार्क, मांचिरेवलु में गिरफ्तार किया गया। उसके बाद उसे पेतबशीराबाद पुलिस स्टेशन में स्थानांतरित कर लिया गया।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस घटना ने टेलंगाना में राजनीतिक उथल-पुथल पैदा की। बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के टीआर रामराव ने मुख्यमंत्री रेवनथ रेड्डी पर आरोप लगाया कि उन्होंने भगीरथ की जमानत में नौ दिन देरी की और पुलिस कार्रवाई में बाधा डाली। विपक्षी दलों ने भी इस मामले पर कड़ी आलोचना की।
कानूनी और सामाजिक निहितार्थ
पीओसीएसओ के तहत यह मामला एक गंभीर अपराध है, और जमानत की मंजूरी से यह स्पष्ट होता है कि न्यायिक प्रक्रिया अभी भी चल रही है। यह निर्णय न केवल कानूनी तंत्र की पारदर्शिता को दर्शाता है, बल्कि सार्वजनिक विश्वास को भी प्रभावित करता है कि सत्ता के सदस्यों को भी कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा।
जमानत के बाद भी भगीरथ को कई शर्तें पूरी करनी होंगी, जिनमें पुलिस के साथ नियमित संपर्क और यात्रा प्रतिबंध शामिल हैं। यह घटना भारतीय न्याय व्यवस्था की जटिलता और संवेदनशील मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप के प्रति जागरूकता को उजागर करती है।