AIADMK के वरिष्ठ नेताओं वेलुमणि और विश्वनाथन ने एक पत्र लिखकर एडप्पाडी के. पलानीस्वामी पर पार्टी को कमजोर करने और गलत गठबंधन निर्णयों का आरोप लगाया है। उन्होंने 2021 और 2026 के चुनावों में हार के लिए पलानीस्वामी की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है।

मुख्य बातें

  • वरिष्ठ नेता वेलुमणि और विश्वनाथन ने पलानीस्वामी के खिलाफ मोर्चा खोला।
  • पार्टी के 400 से अधिक सदस्यों को हटाने और गलत गठबंधन निर्णयों का आरोप।
  • अमित शाह के भाजपा गठबंधन प्रस्ताव को ठुकराने का दावा।
  • ससिकाला और टीटीवी धीनाकरन की पुनः वापसी की मांग।

तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। AIADMK के कद्दावर नेता S.P. वेलुमणि और नाथम आर. विश्वनाथन ने एक चार पन्नों के विस्फोटक पत्र के माध्यम से पार्टी के महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी पर तीखा हमला बोला है। इस पत्र में पार्टी के भीतर चल रहे गंभीर आंतरिक संघर्ष और नेतृत्व की विफलता का खुलासा किया गया है।

गठबंधन की गलतियां और चुनावी हार

पत्र में आरोप लगाया गया है कि पलानीस्वामी के 'मनमाने' निर्णयों के कारण पार्टी ने कई महत्वपूर्ण अवसर गंवा दिए। नेताओं का दावा है कि 2021 विधानसभा चुनाव के दौरान केंद्रीय मंत्री अमित शाह द्वारा प्रस्तावित भाजपा गठबंधन के प्रस्ताव को पलानीस्वामी ने नजरअंदाज कर दिया था। इसके अलावा, उन्होंने TVK (पुथिया तमिळगम) और DMDK जैसे दलों के साथ गठबंधन करने के मौके को भी हाथ से जाने दिया, जिसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ा।

BozokMedia विश्लेषण: क्यों महत्वपूर्ण है यह संकट?

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि AIADMK का यह आंतरिक कलह केवल व्यक्तिगत मतभेद नहीं है, बल्कि यह पार्टी के अस्तित्व का संकट है। यदि वरिष्ठ नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच यह दूरी बनी रही, तो तमिलनाडु में सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। गठबंधन की रणनीतियों में विफलता ने पार्टी को तीसरे स्थान पर धकेल दिया है।

"पलानीस्वामी का नेतृत्व पार्टी को एकजुट करने के बजाय उसे बिखेर रहा है, जिससे दशकों पुराने वफादार कार्यकर्ता भी अब अन्य दलों की ओर रुख कर रहे हैं।"

पत्र में यह भी कहा गया है कि पार्टी के 400 से अधिक अनुभवी सदस्यों को महासचिव द्वारा हटा दिया गया है ताकि कोई उनके खिलाफ आवाज न उठा सके। नेताओं ने V.K. ससिकाला और T.T.V. धीनाकरन को फिर से पार्टी में शामिल करने की पुरजोर वकालत की है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

AIADMK की स्थापना 1972 में हुई थी और यह दशकों तक तमिलनाडु की राजनीति की धुरी रही है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में नेतृत्व परिवर्तन और आंतरिक गुटबाजी ने इसकी ताकत को काफी हद तक कम कर दिया है, जिसका असर 2021, 2024 और 2026 के चुनावों में स्पष्ट रूप से देखा गया है।

क्या आप जानते हैं?: AIADMK तमिलनाडु की उन चुनिंदा पार्टियों में से एक है जिसने दशकों तक क्षेत्रीय राजनीति पर अपना दबदबा बनाए रखा, लेकिन हालिया वर्षों में आंतरिक संघर्ष इसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. वेलुमणि और विश्वनाथन ने किन प्रमुख मुद्दों पर आरोप लगाए हैं?
उन्होंने गलत गठबंधन निर्णयों, वरिष्ठ सदस्यों को हटाने और पलानीस्वामी के मनमाने नेतृत्व का आरोप लगाया है।

2. पत्र में किन नेताओं की वापसी की मांग की गई है?
पत्र में वी.के. ससिकाला और टीटीवी धीनाकरन को पुनः पार्टी में शामिल करने की मांग की गई है।