उत्त प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर दान चोरी के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को हिरासत में रखने की याचिका दायर की है। जांच के दौरान लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और करुणेश पांडे से क्रमशः 14.25, 16.82 और 18.07 लाख रुपये बरामद किए गए।

उत्त प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर दान चोरी के केस में पुलिस ने अदालत से तीन आरोपी—लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और करुणेश पांडे—को हिरासत में रखने की अनुमति मांगी है। यह कदम उन बैंक खातों की जाँच के लिए आवश्यक माना गया है, जिससे यह स्थापित किया जा सके कि बरामद धन का स्रोत दान से जुड़ा है या नहीं।

बरामद रक़म और प्रारम्भिक जांच

जांच के दौरान पुलिस ने लवकुश मिश्रा से 14.25 लाख रुपये, अनुकल्प मिश्रा से 16.82 लाख रुपये और करुणेश पांडे से 18.07 लाख रुपये बरामद किए। अधिकारी इस बात की पुष्टि करना चाहते हैं कि ये रकम दान के रूप में जमा हुई थी या चोरी के बाद किसी अन्य माध्यम से धुंधली हुई है।

स्पेशल इंट्रिगेशन टीम (SIT) की प्रारम्भिक रिपोर्ट

उत्त प्रदेश सरकार द्वारा स्थापित राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर गठित SIT ने 27 अप्रैल से 5 जून 2026 तक की सीसीटीवी फुटेज में लगभग 70 बार नकद बंडलों को कपड़ों, जूतों और व्यक्तिगत सामान में छिपाते हुए देखा। इस रिपोर्ट में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनिष कुमार यादव, करुणेश पांडे और रामाशंकर मिश्रा को प्रारम्भिक संदेहास्पद माना गया है।

सुरक्षा में गंभीर चूक और ट्रस्ट की प्रतिक्रिया

रिपोर्ट ने सुरक्षा प्रोटोकॉल में कई खामियों को उजागर किया—जैसे एंट्री‑एग्जिट पर उचित जाँच न होना, बायोमेट्रिक एटेंडेंस की कमी, अलग‑अलग डोनेट बॉक्स से धन को मिलाना, तथा डोनेट बॉक्स की चाबियों तक अनधिकृत पहुँच। इन चूकों के कारण ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा और काउंटिंग इंचार्ज सुब्बाष श्रीवास्तव को भी जिम्मेदार ठहराया गया।

भविष्य की दिशा और सुधारात्मक कदम

प्रारम्भिक निष्कर्षों के बाद ट्रस्ट ने जनरल सेक्रेटरी चम्पत राय और पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा के राजीनामे को नैतिक कारणों से स्वीकार किया। ट्रस्ट ने कहा कि अब वह पारदर्शिता बढ़ाने और समान घटनाओं को रोकने के लिए नई प्रक्रियाएँ लागू करेगा। पुलिस को आशा है कि हिरासत के दौरान अतिरिक्त धन की बरामदगी और वित्तीय लेन‑देनों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।