96 वर्ष की आयु में मुंबई में निधन हुए नंद किशोर गोयेंका को एसेल ग्रुप के चेयरमैन सुब्बास चंद्र ने सामाजिक सेवा और गौशाला कार्यों के सम्मान में ‘त्योहार’ जैसा विदाई संदेश दिया। उनके अंतिम संस्कार का आयोजन हिसार के गोयेंका उद्यान में किया जाएगा।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- नंद किशोर गोयेंका का निधन 96 वर्ष की आयु में मुंबई में हुआ
- सुब्बास चंद्र ने पिता को सामाजिक‑सेवा‑उत्सव के रूप में याद किया
- अंतिम संस्कार हिसार के गोयेंका उद्यान में आयोजित होगा
नंद किशोर गोयेंका, एसेल ग्रुप के संस्थापक सुब्बास चंद्र के पिता, 96 वर्ष की आयु में मुंबई में अपना अंतिम श्वास छोड़ दिया। उनका जीवन सामाजिक सेवा, गौशाला संरक्षण और राष्ट्रीय कार्यों में समर्पित रहा, जिससे वह कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों में सम्मानित व्यक्ति बन गए।
परिवार और सार्वजनिक श्रद्धा
सुबह ही सुब्बास चंद्र ने ट्विटर (X) पर एक भावनात्मक पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने कहा – “हम अपने प्रिय पिता को ‘त्योहार’ जैसा जश्न मनाकर याद करेंगे। उनका पूरा सफर समाजसेवा, गौसेवा और राष्ट्रसेवा में समर्पित रहा।” इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर भारी प्रतिक्रिया उत्पन्न की, जहाँ कई लोगों ने उनके पिता की सेवा को सराहा।
अंतिम संस्कार की तैयारियां
नंद किशोर गोयेंका के शरीर को पहले मुंबई के उनके आवास पर रख दिया गया जहाँ परिवार, मित्र और शुभचिंतक अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। अगले दिन सुबह सात बजे उन्हें हिसार, हरियाणा के अपने गृह नगर ले जाया जाएगा, जहाँ गोयेंका हाउस (166 कृष्णा मंडी) में रखकर जनसमुदाय को श्रद्धांजलि देने का अवसर मिलेगा। अंत में, बुधवार को सुबह 11 बजे गोयेंका उद्यान, अग्रोहा धाम में अंतिम संस्कार किया जाएगा।
जीवन की प्रमुख उपलब्धियां
28 सितंबर 1930 को हिसार में जन्मे गोयेंका एक प्रतिष्ठित औद्योगिक परिवार से थे, परन्तु उन्होंने व्यापार से हटकर सामाजिक कार्यों को अपना मुख्य लक्ष्य बनाया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सक्रिय सदस्य के रूप में उन्होंने विभिन्न कार्यक्रमों में योगदान दिया, जिसमें सामाजिक सामंजस्य, राष्ट्रीय सेवा और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देना शामिल था।
शिक्षा और गौशाला क्षेत्र में योगदान
वे श्री देवी भवन मंदिर गौशाला ट्रस्ट के अभिभावक तथा श्री वैष्णव अग्रसेन गौशाला के अध्यक्ष थे। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने फतेह चंद महिला कॉलेज के चेयरमैन के रूप में सेवा की और हिसार के पाडव चौक में स्थित जीएनजी गोयेंका स्कूल के विकास में सहयोग दिया। उनका गौसेवा के प्रति समर्पण और वैश्य समुदाय को सुदृढ़ करने का प्रयास आज भी याद किया जाता है।
समापन
नंद किशोर गोयेंका का निधन एक सामाजिक नेता के रूप में उनके योगदान को समाप्त नहीं करता। उनके कार्यों ने कई पीढ़ियों को प्रेरित किया है और उनका स्मरण आज भी सामाजिक, धार्मिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में जीवित रहेगा।