बद्रीनाथ मंदिर में दान की चोरी की जाँच कर रहे विशेष जांच टीम (SIT) ने देहरादून में सस्पेंडेड बीकेटीसी अधिकारी प्रमोद नौटियाल को हिरासत में ले लिया। यह कदम मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के सवालों को तीव्र कर रहा है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सस्पेंडेड BKTC अधिकारी प्रमोद नौटियाल को देहरादून में गिरफ्तार किया गया।
  • बद्रीनाथ मंदिर में दान चोरी के मामले की जांच में SIT ने कार्रवाई तेज़ की।
  • जांच से मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व पर सवाल उठे।

बद्रीनाथ मंदिर, जो हिन्दुओं के चार धामों में से एक है, में हाल ही में बड़े पैमाने पर दान चोरी का मामला सामने आया। इस चोरी में लाखों रुपये की नकद राशि शामिल थी, जो भक्तों द्वारा श्रद्धा के प्रतीक के रूप में मंदिर को दी जाती है। इस घटना ने धार्मिक संस्थानों में धन प्रबंधन की पारदर्शिता पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया।

पृष्ठभूमि और दान प्रक्रिया

बद्रीनाथ‑केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) मंदिर के प्रशासन, रखरखाव और दान संग्रह की जिम्मेदारी संभालती है। आम तौर पर दान को सुरक्षित खातों में जमा किया जाता है, और उसकी निगरानी समिति के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जाती है। लेकिन पिछले कुछ महीनों में दान की गिनती में अनियमितताएँ पाई गईं, जिससे कई भक्तों ने चिंता व्यक्त की।

चोरी का विवरण और प्रारंभिक जांच

जांच के अनुसार, लगभग ₹2.5 करोड़ की नकद राशि 2025 के अंतिम तिमाही में चोरी हुई थी। प्रारंभिक जांच में कुछ स्थानीय कर्मचारियों को संदेहास्पद माना गया, पर साक्ष्य अपर्याप्त रहा। इस कारण विशेष जांच टीम (SIT) को उच्च स्तर की जाँच के लिए गठित किया गया, जिसमें केंद्रीय और राज्य स्तर के अधिकारी शामिल थे।

SIT की कार्रवाई और नवीनतम विकास

सप्ताहों की गहन पूछताछ के बाद, SIT ने पता लगाया कि दान प्रबंधन के निजी सचिव के रूप में कार्यरत प्रमोद नौटियाल ने ही इस चोरी में प्रमुख भूमिका निभाई थी। नौटियाल, जो BKTC के चेयरमैन के निजी सचिव थे, को दान के लेखा‑जोखा और वितरण में अधिकार प्राप्त था। रविवार रात को देहरादून में उनकी गिरफ्तारी के बाद, जांचकर्ता उनके बैंक खातों, मोबाइल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जाँच कर रहे हैं।

भविष्य के प्रभाव और संभावित परिणाम

इस गिरफ्तारी से मंदिर प्रबंधन में गहरी जाँच की आवश्यकता स्पष्ट हुई है। उत्तराखंड सरकार को अब दान संग्रह की प्रक्रिया को डिजिटल बनाकर पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में कदम उठाने की मांग बढ़ रही है। साथ ही, धार्मिक संस्थानों में धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़े नियामक उपायों की भी चर्चा हो रही है। यदि आगे की जाँच में अन्य उच्च‑स्तरीय अधिकारी शामिल पाए जाते हैं, तो यह राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बड़े बदलावों की ओर इशारा कर सकता है।