एक नई वैज्ञानिक रिपोर्ट ने सुझाया है कि समुद्र में सूर्य की रोशनी को घटाकर एल नीनो की तीव्रता को नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे वैश्विक आर्थिक नुकसान कम हो सकते हैं। यह प्रस्ताव समुद्री बादल चमकाने (MCB) तकनीक पर आधारित है।

वैश्विक जलवायु पर असर डालने वाले सबसे नाटकीय घटनाओं में से एक, एल नीनो, इस वर्ष अभूतपूर्व तीव्रता के करीब पहुँच रहा है। वैज्ञानिकों ने बताया कि समुद्र के सतह पर सूर्य के प्रकाश को घटाने से इस घटना की शक्ति को सीमित किया जा सकता है, जिससे सूखे, बाढ़ और चक्रवात जैसी आपदाएँ कम हो सकती हैं।

एल नीनो का मूलभूत तंत्र

एल नीनो हर कुछ वर्षों में उष्णकटिबंधीय प्रशांत में स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होता है, जब व्यापारिक हवाएँ कमजोर पड़ती हैं और गर्मी दक्षिण अमेरिकी तट की ओर धकेलती है। इससे वैश्विक तापमान में असामान्य वृद्धि, कुछ क्षेत्रों में सूखा, अन्य में तीव्र वर्षा और प्रशांत में चक्रवात की संभावना बढ़ती है। जीवाश्म ईंधन के जलने से उत्पन्न अतिरिक्त गर्मी के साथ मिलकर यह आर्थिक नुकसान को सैकड़ों अरब डॉलर तक पहुंचा सकता है।

समुद्री बादल चमकाने (MCB) का सिद्धांत

कैथरीन रिक और उनके सहलेखकों ने समुद्री बादलों में समुद्री जल के कणों को छिड़क कर उनकी परावर्तकता बढ़ाने के विचार को प्रस्तुत किया। इसे Marine Cloud Brightening या MCB कहा जाता है, जो सूर्य की किरणों को वापस अंतरिक्ष की ओर मोड़ता है। छोटे पैमाने पर परीक्षण किए गए हैं, परंतु इस तकनीक को अभी बड़े स्तर पर लागू नहीं किया गया है।

ऑस्ट्रेलिया के जंगल आग से प्रेरणा

शोधकर्ता 2019‑2020 के ऑस्ट्रेलिया के विनाशकारी जंगल आग के दौरान उत्पन्न विशाल धुआं, जो लगभग एक मिलियन मीट्रिक टन था, को प्राकृतिक प्रयोगशाला मानते हैं। धुएँ में मौजूद प्रतिबिंबित कणों ने स्ट्रैटोस्फीयर में प्रकाश को परावर्तित कर एक दुर्लभ "त्रिपल‑डिप" ला नीना को उत्पन्न किया, जो एल नीनो का उल्टा चरण है। इस घटना ने वैज्ञानिकों को MCB की संभावित प्रभावशीलता को मॉडल करने का अवसर दिया।

मॉडलिंग परिणाम और संभावित प्रभाव

रिसर्च टीम ने दो ऐतिहासिक एल नीनो घटनाओं पर MCB‑आधारित मॉडल चलाया। परिणाम दर्शाते हैं कि प्रशांत सतह पर पहुँचने वाली सूर्य की रोशनी को कम करने से एल नीनो की तीव्रता और उसके वैश्विक प्रभाव दोनों में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। इस प्रकार, जलवायु परिवर्तन के अतिरिक्त दबाव को कम करने के लिए क्षेत्रीय जियोइंजीनियरिंग एक व्यवहार्य विकल्प बन सकता है।

राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियाँ

जियोइंजीनियरिंग को अक्सर पूरी पृथ्वी को ठंडा करने के साधन के रूप में देखा गया है, लेकिन इस अध्ययन ने क्षेत्रीय दृष्टिकोण की वकालत की है। हालांकि, इस तरह के प्रयोगों को लागू करने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग, नियामक ढाँचा और संभावित अनपेक्षित जलवायु प्रभावों को लेकर गंभीर चिंता है। टेક્સास ए एंड एम विश्वविद्यालय के एण्ड्र्यू डेस्लर ने कहा कि इस तरह का प्रोजेक्ट "राजनीतिक दुःस्वप्न" बन सकता है, यदि कोई त्रुटि हुई तो वैश्विक संघर्ष का खतरा उत्पन्न हो सकता है।

अंत में, रिक ने कहा कि मॉडलिंग चरण में कई अनिश्चितताएँ हैं, लेकिन यदि जीवाश्म‑ईंधन‑आधारित प्रदूषण को नियंत्रित नहीं किया गया तो भविष्य में इस तरह की जियोइंजीनियरिंग की आवश्यकता बढ़ सकती है।