UPSC Essentials ने विज्ञान‑प्रौद्योगिकी विषय में साप्ताहिक क्विज़ जारी किया, जिसमें फ्लेक्स‑फ़्यूल वाहनों, अल्जाइमर रोग और स्विफ्ट ऑब्ज़र्वेटरी से जुड़े प्रश्न शामिल हैं। यह क्विज़ अभ्यर्थियों को ईथेनॉल‑ब्लेंडेड पेट्रोल योजना और अंतरिक्ष मिशनों की मौजूदा नीति‑परिस्थितियों से परिचित कराता है।

UPSC क्विज़ का उद्देश्य

UPSC Essentials द्वारा आयोजित विषय‑वार क्विज़ का मुख्य लक्ष्य सिविल सेवा उम्मीदवारों को स्थैतिक सिलेबस के महत्वपूर्ण बिंदुओं की पुनरावृत्ति कराना है। विज्ञान‑प्रौद्योगिकी सेक्शन में प्रत्येक प्रश्न न केवल सिद्धान्तीय समझ को परखता है, बल्कि वर्तमान सरकारी पहल और अंतरराष्ट्रीय तकनीकी विकास की जागरूकता भी बढ़ाता है।

फ्लेक्स‑फ़्यूल वाहन और भारत की ईथेनॉल नीति

पहला प्रश्न फ्लेक्स‑फ़्यूल वाहनों (FFVs) पर केंद्रित है, जो मिश्रित ईथेनॉल‑पेट्रोल (E20, E25, E85‑E100) पर चलने के लिये डिज़ाइन किए गए आंतरिक दहन इंजन वाले वाहन हैं। भारत में 2023‑2026 के बीच ईबीपी (Ethanol Blended Petrol) योजना के तहत E20 को राष्ट्रीय मानक बना दिया गया, और अब E25 तथा उच्च‑ब्लेंड विकल्पों की दिशा में प्रगति हो रही है। इन वाहनों में फ्यूल‑सेंसर इंधन मिश्रण का पता लगाकर इंधन‑इंजेक्शन एवं इग्निशन टाइमिंग को स्वचालित रूप से समायोजित करता है, जिससे दो या अधिक फ्यूल का सहज उपयोग संभव होता है। हालांकि, वे अभी भी कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन करते हैं, इसलिए ‘शून्य ग्रीनहाउस गैस’ का दावा गलत है। इतिहास में 1979 में इटली की फिएट द्वारा ब्राज़ील में लॉन्च किया गया 147 मॉडल पहला पूर्ण‑ईथेनॉल वाहन था, परन्तु भारत ने अभी तक ऐसा पूर्ण‑ईथेनॉल वाहन नहीं बनाया है।

अल्जाइमर रोग से संबंधित प्रश्न

दूसरे प्रश्न में अल्जाइमर रोग की दो मुख्य विशेषताओं पर चर्चा की गई – स्मृति क्षय और हिप्पोकैम्पस का प्रारम्भिक प्रभावित होना। हालिया हार्वर्ड‑बीएमजे अध्ययन ने दिखाया कि टैकसी और एम्ब्युलेंस ड्राइवर जैसे निरन्तर नेविगेशन वाले पेशों में रोग के जोखिम में कमी देखी गई, जबकि स्थायी मार्ग वाले बस ड्राइवरों में ऐसा नहीं दिखा। यह शोध न केवल रोग की पैथोफिज़ियोलॉजी को उजागर करता है, बल्कि कार्यस्थल‑आधारित स्वास्थ्य निवारण में संभावित रणनीतियों की ओर संकेत करता है।

स्विफ्ट ऑब्ज़र्वेटरी और अंतरिक्ष मौसम

तीसरा प्रश्न नील गेहर्ल्स स्विफ्ट ऑब्ज़र्वेटरी की मिशन प्रोफ़ाइल को उजागर करता है। यह सैटेलाइट मुख्यतः गामा‑रे बर्स्ट और उच्च‑ऊर्जा ब्रह्माण्डीय घटनाओं के अध्ययन हेतु बनाया गया था। हालिया सौर गतिविधि में वृद्धि ने निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में वायुमंडलीय घर्षण को बढ़ाया, जिससे स्विफ्ट की कक्षा धीरे‑धीरे घट रही है। NASA ने निजी‑निर्मित रेस्क्यू मॉड्यूल भेजकर इस ऑब्ज़र्वेटरी को फिर से ऊँचा करने की कोशिश की, जो अंतरिक्ष में दीर्घकालिक मिशन संचालन के लिये एक नया मॉडल स्थापित करता है।

उम्मीदवारों के लिए तैयारी टिप्स

इन प्रश्नों की तैयारी के लिये उम्मीदवारों को तीन मुख्य रणनीतियों को अपनाना चाहिए: (i) नवीनतम सरकारी नीतियों – जैसे ईथेनॉल ब्लेंड, वैकल्पिक ईंधन और ऊर्जा सुरक्षा – की नियमित समीक्षा; (ii) वैज्ञानिक अवधारणाओं को वास्तविक‑विश्व केस स्टडीज (जैसे अल्जाइमर रोग में हिप्पोकैम्पस) के साथ जोड़ना; तथा (iii) अंतरिक्ष विज्ञान में सौर‑मौसम के प्रभावों को समझना, जिससे भविष्य में संभावित प्रश्नों का अनुमान लगाया जा सके। इस प्रकार, UPSC विज्ञान‑प्रौद्योगिकी क्विज़ न केवल ज्ञान का परीक्षण करता है, बल्कि रणनीतिक सोच को भी प्रेरित करता है।