मदुराई के सिवाकाशी नाडर मैट्रिकुलेशन स्कूल के कक्षा 12 के छात्र आकिलेश चंद्रशेखरन ने मार्स के रेगोलिथ समकक्ष पर बैक्टीरिया द्वारा बिजली उत्पन्न करने का सफल प्रयोग किया। उनका प्रयोग NASA के Cubes in Space™ 2026 कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा, जिससे भविष्य के मंगल मिशनों में सतत ऊर्जा की नई संभावनाएँ खुलेंगी।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- अकिलेश ने मार्स के रेगोलिथ समकक्ष पर बैक्टीरिया द्वारा बिजली उत्पादन सिद्ध किया।
- उनका 4 सेमी क्यूब NASA के Cubes in Space™ 2026 कार्यक्रम में मंगल पर भेजा जाएगा।
- परिणाम भविष्य के मानव मिशनों के लिए सतत ऊर्जा समाधान प्रदान कर सकते हैं।
मदुराई के सिवाकाशी नाडर मैट्रिकुलेशन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के कक्षा XII के छात्र अकिलेश चंद्रशेखरन ने एक मार्सियन रेगोलिथ एनालॉग पर बैक्टीरिया‑आधारित विद्युत उत्पादन का प्रयोग करके अंतरिक्ष विज्ञान में नया मील का पत्थर रखा है। यह प्रयोग NASA की Cubes in Space™ 2026 पहल के तहत चयनित हुआ और 21 अगस्त को मंगल ग्रह की ओर प्रेषित किया जाएगा।
प्रारंभिक जिज्ञासा और प्रेरणा
अकिलेश ने पाँचवी कक्षा में ही “गहरी अंतरिक्ष में क्या है?” सवाल से विज्ञान की ओर अपना मार्ग प्रशस्त किया। उसके माता‑पिता ने विज्ञान‑कथाओं की पुस्तकें उपहार में दीं, जबकि कोविड‑19 महामारी के दौरान वह उपग्रहों पर वेबिनार में सक्रिय रूप से भाग लेता रहा। भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को अपनी प्रेरणा मानते हुए, वह बचपन से ही रॉकेट निर्माण और अंतरिक्ष तकनीक में रुचि लेता आया।
Cubes in Space™ 2026 कार्यक्रम
यह अंतरराष्ट्रीय छात्र‑अनुसंधान कार्यक्रम iEDU Inc. द्वारा आयोजित, NASA के Wallops Flight Facility और Columbia Scientific Balloon Facility के सहयोग से संचालित है। चयनित क्यूब, लगभग 4 सेमी आकार का, मार्स की सतह पर स्थित रेगोलिथ समकक्ष के साथ एक प्रयोगात्मक मॉड्यूल ले जाएगा, जो पृथ्वी पर विकसित बैक्टीरिया Shewanella oneidensis MR‑1 के माध्यम से विद्युत उत्पन्न करेगा।
वैज्ञानिक सिद्धांत और प्रयोग का विवरण
अकिलेश ने प्रस्तावित किया कि एक अंतरिक्ष यात्री प्रतिदिन लगभग 4.5 लीटर कचरा जल उत्पन्न करता है। इस जल को यदि Shewanella oneidensis MR‑1 द्वारा उपचारित किया जाए, तो वह न केवल प्रदूषण को हटाएगा बल्कि इलेक्ट्रॉन को मुक्त कर विद्युत उत्पन्न करेगा। यह दो‑उद्देशीय प्रणाली, मार्स के धूल‑तूफ़ान से उत्पन्न सौर ऊर्जा कमी को पूरा करने के लिए संभावित समाधान प्रस्तुत करती है।
भविष्य के प्रभाव और सहयोग
प्रयोग से प्राप्त डेटा NASA के वैज्ञानिकों और ISRO के शोधकर्ताओं के साथ साझा किया जाएगा, जिससे मानव बस्तियों के लिए स्थायी ऊर्जा उत्पादन की नींव रखी जा सकेगी। स्कूल के सचिव सेंटिल कुमार ने कहा, “अकिलेश की यह उपलब्धि राष्ट्र के लिए गर्व का कारण है और अन्य छात्रों को विज्ञान के क्षेत्र में उच्चतम शिखर तक पहुंचने के लिए प्रेरित करेगी।”