भारत मौसम विज्ञान विभाग ने आज के मौसम की भविष्यवाणी जारी की – उत्तर‑पश्चिम, मध्य और प्रायद्वीपीय भारत में सूखा रहेगा, जबकि बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। मेघालय में 20 सेमी से अधिक वर्षा की आशंका है।

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मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर में भारी बारिश की संभावना
  • देश के अधिकांश हिस्सों में सूखा मौसम जारी
  • मॉनसून ट्रफ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन ने मौसम को प्रभावित किया

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 14 जुलाई को जारी किए गए मौसम पूर्वानुमान में बताया कि अगले तीन‑चार दिनों तक देश के पूर्वोत्तर, बिहार और पश्चिम बंगाल में भारी से बहुत भारी बारिश जारी रहेगी, जबकि उत्तर‑पश्चिम, मध्य और प्रायद्वीपीय भारत में मॉनसून की गतिविधियां कमजोर रहेंगी।

भारी बारिश के प्रमुख केंद्र

मेघालय में 20 सेमी से अधिक वर्षा की संभावना जताई गई है, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में बाढ़ और भू-स्खलन का खतरा बढ़ गया है। उप‑हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, त्रिपुरा और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी 7‑11 सेमी तक की तीव्र बारिश दर्ज की गई। इन क्षेत्रों में जलस्तर तेज़ी से बढ़ रहा है, इसलिए स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने और आपातकालीन उपायों की तैयारी करने का आह्वान किया गया है।

सूखा का विस्तार

दूसरी ओर, उत्तर‑पश्चिम, मध्य और प्रायद्वीपीय भागों में मॉनसून ट्रफ़ का प्रवाह हिमालय की तलहटी के करीब रहने के कारण कमजोर हो गया है। परिणामस्वरूप इन क्षेत्रों में मौसम ड्राई रहेगा, जिससे कृषि कार्य और जल आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। विशेषकर पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे प्रमुख कृषि केंद्रों को जल संरक्षण के उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।

मौसमीय प्रणाली का विश्लेषण

IMD ने इस असमान मौसम पैटर्न के पीछे कई सक्रिय मौसम प्रणालियों को बताया – श्री गंगानगर‑मणिपुर तक फैला मॉनसून ट्रफ़, दक्षिण बांग्लादेश के ऊपर साइक्लोनिक सर्कुलेशन, तथा उत्तर‑पश्चिम बिहार‑मणिपुर तक फैला एक अतिरिक्त ट्रफ़। इसके अतिरिक्त, मध्य पाकिस्तान के ऊपर स्थित एक पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) ने उत्तर‑भारत के मौसम को और जटिल बना दिया है।

भविष्य की संभावनाएं

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मौसमी असंतुलन जारी रहा तो अगले दो‑तीन हफ्तों में उत्तर‑भारत में फिर से मॉनसून की सक्रियता बढ़ सकती है, जबकि पूर्वोत्तर में वर्षा का स्तर उच्चतम स्तर पर बना रह सकता है। इस परिप्रेक्ष्य में, जल प्रबंधन, बाढ़ चेतावनी प्रणालियों और कृषि योजना को तुरंत पुनः समीक्षा करना आवश्यक होगा।